Thursday, April 19, 2012

Scholarship Plan for the students of Swarnkar Community by Swarnkar Samaj Utthan Sangh


स्वर्णकार समाज के शैक्षिक उत्थान हेतु समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिये स्वर्णकार समाज उत्थान समिति द्वारा छात्रवृत्ति योजना प्रारम्भ

स्वर्णकार समाज उत्थान समिति (रजि.) द्वारा वर्ष 2012 से माध्यमिक (कक्षा 8 से 10 तक) तथा उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा 11 12) पर अध्ययनरत् विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियाँ प्रदान करने की योजना तैयार की गई है। जिसके अन्तर्गत निम्नानुसार छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जायेंगी-
1-    मेरिट छात्रवृत्ति - राजस्थान में बोर्ड ऑफ सैकण्डरी एजुकेशन राजस्थान, अजमेर अथवा सीबीएसई बोर्ड, नई दिल्ली द्वारा आयोजित माध्यमिक अथवा उच्च माध्यमिक स्तरीय वार्षिक परीक्षा में राज्य अथवा जिला स्तर पर प्रथम 15 मेरिट क्रमांक तक आने वाले विद्यार्थियों को 5100/- प्रति विद्यार्थी (प्रारम्भिक चरण वर्ष 2012 में अधिकतम 05 विद्यार्थी) की राशि छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान की जायेगी।
2-   आवश्यकता आधारित प्रतिभाशाली विद्यार्थियों हेतु छात्रवृत्ति (विद्यालय स्तर पर अध्ययन हेतु कक्षा 08 से 12 तक) - इसके अन्तर्गत ऐसे विद्यार्थी जो धनाभाव के कारण शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ हैं अथवा कठिनाई अनुभव कर रहे हैं, को छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी। (प्रारम्भिक चरण वर्ष 2012 में अधिकतम 06 विद्यार्थी) इस श्रेणी के अन्तर्गत तीन उपश्रेणियां बनाई गई हैं:-
2-1           आवश्यकता आधारित उच्च प्रतिभाशाली विद्यार्थी - इस श्रेणी में उन विद्यार्थियों को लाभ प्रदान किया जा सकेगा। जिनके प्राप्तांक पिछली कक्षा में 75 प्रतिशत या इससे अधिक हैं। इस हेतु प्रति छात्र 7100/- रुपये अथवा विद्यालय की कुल वार्षिक फीस की राशि दोनों में से जो न्यून हो छात्रवृत्ति के रूप में एक वर्ष हेतु प्रदान की जायेगी। (प्रारम्भिक चरण वर्ष 2012 में अधिकतम 02 विद्यार्थी)
2-2          आवश्यकता आधारित औसत प्रतिभाशाली विद्यार्थी - इस श्रेणी में उन विद्यार्थियों को लाभ प्रदान किया जा सकेगा। जिनके प्राप्तांक पिछली कक्षा में 60 प्रतिशत या इससे अधिक तथा 75 प्रतिशत से कम हैं। इस हेतु प्रति छात्र 6100/- रुपये अथवा विद्यालय की कुल वार्षिक फीस की राशि दोनों में से जो न्यून हो छात्रवृत्ति के रूप में एक वर्ष हेतु प्रदान की जायेगी। (प्रारम्भिक चरण वर्ष 2012 में अधिकतम 02 विद्यार्थी)
2-3          आवश्यकता आधारित अल्प प्रतिभाशाली विद्यार्थी - इस श्रेणी में उन विद्यार्थियों को लाभ प्रदान किया जा सकेगा। जिनके प्राप्तांक पिछली कक्षा (उत्तीर्ण) में प्राप्तांकों का प्रतिशत 60 प्रतिशत से न्यून है। इस हेतु प्रति छात्र 5100/- रुपये अथवा विद्यालय की कुल वार्षिक फीस की राशि दोनों में से जो न्यून हो छात्रवृत्ति के रूप में एक वर्ष हेतु प्रदान की जायेगी। (प्रारम्भिक चरण वर्ष 2012 में अधिकतम 02 विद्यार्थी)

विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने संबंधी नियम एवं अधिक जानकारी हेतु संस्था की बेवसाइट से सूचना डाउनलोड की जा सकती है अथवा निम्न पदाधिकारियों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है:-
सम्पर्क व्यक्ति : गजेन्द्र सोनी-अध्यक्ष (9414074401),
योगेश सोनी-सचिव (9314023251), उमेश कुमार सोनी-संयोजक (9314405401)
कार्यालय पता :
ए-1, गोविन्द देव कॉलोनी, चौगान स्टेडियम के पीछे, तालकटोरा, जयपुर-302002
बेवसाइट : www.swarnkarutthan.com, ई-मेल : ssus.rajasthan@gmail.com
ब्लॉग : http://swarnkarutthan.blogspot.com

Sunday, January 29, 2012



परिवार टूटे तो अपने रूठे : अपने रूठे तो सपने टूटे
जयपुर, 29 जनवरी। स्वर्णकार समाज उत्थान संघ जयपुर की ओर से 29 जनवरी को पिंक सिटी प्रेस क्लब सभागार में ''टूटते परिवार बिखरते सपने'' विषयक संगोष्ठी व स्मारिका का विमोचन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एण्ड टेक्नोलॉजी के चेयरमैन डॉ एम.एल. स्वर्णकार थे। अध्यक्ष एम.एन.आई.टी. संस्थान से मानविकी विभाग प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्ता प्रोफेसर डॉ आर.एस. वर्मा, विशिष्ठ अतिथि वित्ता (आबकारी) विभाग, राजस्थान सरकार में वरिष्ठ लेखाधिकारी श्री सुनील सोनी, मुख्य वक्ता डॉ अशोक कुमार शरर््मा, प्राचार्य, श्री अग्रसेन स्नातकोत्तार शिक्षा महाविद्यालय सीटीई, जामडोली, जयपुर तथा अन्य मुख्य वक्ता डॉ प्रभा वर्मा सहायक आचार्य, हिन्दी विभाग, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। श्री कैलाशचंद सारडीवाल द्वारा स्वर्णकार समाज उत्थान संघ का परिचय दिया गया। इसके पश्चात् डॉ सुधीर सोनी ने कार्यक्रम की रूपरेखा की विस्तृत जानकारी दी। मुख्य वक्ता डॉ प्रभा वर्मा ने कहा कि कहा कि आज के भौतिकवाद के युग में जिस प्रकार से परिवार टूटते जा रहे हैं वह एक अत्यंत सोचनीय विषय है। मनुष्य के लिए परिवार ही उसका समाज होता है वही उसके विकास का प्राथमिक केन्द्र होता है। उन्होंने कहा कि परिवार में रहकर ही व्यक्ति अपने सपनों को पूरा कर सकता है, लेकिन आज भाई-भाई में इतनी तकरारें हो जाती है कि वो आपस में एक-दूसरे के दुश्मन बने बैठे हैं। विशिष्ठ अतिथि सुनील सोनी ने कहा कि टूटते परिवार बिखरते सपने विषय एक ज्वलंत मुददा है आज समाचार पत्रों में रोज आत्महत्या, दहेज प्रताडना की खबरें छप रही हैं। ऐसे मामलों से ना केवल उनके बल्कि उनके परिवार के हर एक सदस्य के सपने मोतियों की तरह बिखर जाते हैं। माता-पिता तथा बच्चों के मध्य संबंध इतने बिगड़ गए कि हमें 'ओल्डएज होम' की स्थापना करनी पड़ रही है। डॉ एमएल स्वर्णकार ने अपने संबोधन में कहा कि हर समाज की तरह हमारे समाज के लोगों को भी परिवार के साथ-साथ अपने समाज के पूरे परिवार के साथ एकजुटता के साथ रहना चाहिए। हमें अपने परिवारों को तोडना नही बल्कि हमें उन सभी परिवारों के लोगों से यही आहवान करना चाहिए कि वे अपने परिवार को जोडें और परिवार की उम्मीदों और सपनों को साकार करें। डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि हमारे देश में 'वसुधैव कुटुम्बकम' की भावना रही है। यहा। पृथक परिवार की संकल्पना कभी की ही नहीं गई। वर्तमान परिदृश्य पाश्चात्य संस्कृति की देन है। इसी प्रकार डॉ आर. एस वर्मा ने बड़े ही सहज और सरल शब्दों में अपना उद्बोधन दिया। कार्यक्रम के अंत में स्वर्णकार समाज उत्थान संघ के अध्यक्ष गजेन्द्र सोनी ने आगंतुकों का आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में समाज की अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी तथा अन्य प्रबुध्द वर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित था। कार्यक्रम में मंच संचालन योगेश सोनी तथा सागर सोनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के संयोजक उमेश कुमार सोनी रहे।

Wednesday, November 9, 2011


स्वर्णकार समाज-उत्थान संघ, जयपुर
''टूटते परिवार बिखरते सपने'' विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन
यह हम सभी जानते हैं कि हमारा देश कभी विश्व गुरू रहा है और पूरे विश्वास के साथ यह कहा जा रहा है कि हमारी वह स्थिति पुन: प्रकट होगी और हम फिर से सम्पूर्ण विश्व का प्रतिनिधित्व करेंगे। ऐसा इसलिए था क्योंकि हमारे देश की संस्कृति, संस्कार, परम्पराएं, ज्ञान विश्व में सर्वश्रेष्ठ रहे हैं। हमारे देश की एकता एवं अखण्डता में सबसे बड़ा योगदान हमारी पारिवारिक संगठित संरचना का रहा है, जिसे हम ''संयुक्त परिवार'' की संज्ञा देते हैं। जिसमें परिवार के सभी सदस्य हमेशा एक साथ रहते हुए एक-दूसरे के सुख-दुख के भागेदार बनते हैं और यही व्यवस्था हमारे परिवार को एक सूत्र में पिराये रखती है और आगे यह समाज की और फिर देश की एकता की महत्वपूर्ण कड़ी बनती है। किन्तु बड़े दुख की बात है कि विगत कुछ समय से यह पारिवारिक संरचना अपना मूल स्वरूप खो रही है, जिसका कारण संभवत: हमारे अंदर मूल्यों का विघटन होना है। परिणामस्वरूप ''संयुक्त परिवार'' का स्थान ''एकल परिवार'' ने ले लिया है और कहते हुए बड़ा दुख होता है कि बड़े-बड़े शहरों में ''एकल परिवार'' भी अपना अस्तित्व कायम रखने में असफल हो रही है और अब इंडीवीज्यूल्स फैमिली (परिवार का प्रत्येक सदस्य अलग-अलग हैं और मात्र एक व्यक्ति ही अपने आप में फैमिली बनकर रह गया है) का कॉन्सैप्ट जाने-अनजाने हम पर हावी होता जा रहा है। अब और कितना विघटन हमारी पारम्परिक पारिवारिक व सामाजिक संरचना का होगा ? कहना मुश्किल है और यह एक बहुत गंभीर समस्या है जिस पर चिन्तन कर सकारात्मक प्रयास करते हुए इसका समाधान खोजना अत्यन्त आवश्यक है।
इसी उद्देश्य को लेकर स्वर्णकार समाज-उत्थान संघ, जयपुर द्वारा सामाजिक चेतना हेतु निरन्तर किए जा रहे प्रयासों की कड़ी में उक्त गंभीर मुद्दे पर चिन्तन करने की दृष्टि से ''टूटते परिवार बिखरते सपने'' विषय पर संगोष्ठी का आयोजन माह जनवरी, 2012 में प्रायोज्य है। इस कार्यक्रम के आयोजन से पूर्व इस विषय पर एक स्मारिका का प्रकाशन किया जायेगा, जिसका विमोचन कार्यक्रम के अन्तर्गत किया जायेगा। इस स्मारिका में समाज के विद्वतजनों से उक्त विषय पर लेख आमंत्रित किए जा रहे हैं। उक्त विषय पर आधारित उप-विषय निम्न प्रकार से हैं, जिनमें से आप अपनी स्वेच्छानुसार किसी भी एक विषय का चयन पर अपना लेख प्रेषित करने की कृपा करें-
1.  संयुक्त परिवार : भूमिका, आवश्यकता, परम्परा, समकालीन प्रासंगिकता
2. एकल परिवार : प्रासंगिकता, अवमूल्यन, कठिनाईयाँ, सुझाव
3. बिखरते परिवार : क्या छोडें, क्या सहेजें
4. कैरियर और परिवार : कैसे हो सामंजस्य
5. समकालीन समाज : भविष्य, सपने व वास्तविकताएँ
6. अनुभव या संघर्ष : परिवार बनाम अकेलापन
7. कितने महत्वपूर्ण हैं रिश्ते ?
8. सामंजस्य, समाज, परिवार : कैसे हो संतुलन ?
9. परिवार और महिला : भूमिका व व्यवस्था
10. परिवार और सदस्य : सबकी अपनी बात

लेख के संबंध में निम्न बातों का ध्यान रखें-
1.  लेख यदि हस्तलिखित हो तो A4 साइज के पांच पृष्ठों से अधिक न हो।
2. लेख यदि कम्प्यूटर द्वारा टाईप्ड हो तो A4 साइज के तीन पृष्ठों से अधिक न हो तथा जिसमें फोन्ट का आकार किसी भी लिपी में किन्तु 14 पाइंट से अधिक न हो।
3. लेखों को स्मारिका में स्थान देने अथवा नहीं देने का पूर्ण अधिकार सम्पादक मण्डल का रहेगा, इस विषय में किसी भी प्रकार के विवाद पर विचार नहीं किया जायेगा।
4. मूल लेख में संशोधन करने का अधिकार भी पूर्ण रूप से सम्पादक मण्डल को रहेगा, इस विषय में भी किसी प्रकार के विवाद पर विचार नहीं किया जायेगा।
5. लेख ऊपर दिये गये किसी एक उप-विषय पर ही आधारित हो तथा लेख लिखते समय कृपया विषय-वस्तु, आंकड़ों एवं तथ्यों की सत्यता की जांच कर लें, इस संबंध में सम्पूर्ण जिम्मेदारी लेखक की स्वयं की होगी।
6. लेख नीचे दिये पते अथवा ई-मेल पर 10 दिसम्बर, 2011 तक (एक पासपोर्ट साइज फोटो के साथ) अनिवार्य रूप से पहुंच जाने चाहिए, इसके पश्चात् प्राप्त लेखों पर विचार करना संभव नहीं होगा।
नोट : स्मारिका में प्रकाशन हेतु विज्ञापन भी आमंत्रित किए जा रहे हैं। स्मारिका में विज्ञापन प्रकाशन के संबंध में पूर्ण जानकारी के लिये कृपया सम्पर्क करें-
1. विरेन्द्र सोनी (उपाध्यक्ष), 9414272977, 2. योगेश सोनी (सचिव), 9314023251
लेख भेजने हेतु पता :
संस्था कार्यालय पता : एफ.आई.आई.टी. सेंटर, ए-1, गोविन्द देव कॉलोनी, चौगान स्टेडियम के पीछे, ब्रह्मपुरी, जयपुर-302002 (राजस्थान)
अथवा
ई-मेल पता : ssus.rajasthan@gmail.com

उमेश कुमार सोनी                                     डॉ. सुधीर सोनी
   सम्पादक                                         प्रधान सम्पादक
 9314405401                                       9414716676


Monday, October 10, 2011

Significance of Maharaja Ajmeed Jayanti Celebration

सर्वप्रथम समस्त स्वर्णकार बंधुओ को महाराजा अजमीड़ जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं. 
जैसा की आप सभी जानते हैं की दिनांक ११.१०.११ को महाराजा अजमीड़ की जयंती है और बड़े हर्ष का विषय है की संपूर्ण भारत वर्ष में विभिन्न संगठनों द्वारा यह जयंती बड़े हर्शोल्लाश के साथ मनाई जाएगी और क्यु न मनाई जाये आखिर महाराजा अजमीड़ मेड क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के आदिपुरुष हैं और हमें गर्व है की महाराजा अजमीड़ जैसे महाप्रतापी राजा के हम वंशज हैं.  लेकिन विचारणीय बिंदु यह है की क्या हम सही मायनों में अजमीड़ जयंती मानते आ रहे हैं और इस बार भी मना पाएंगे. किसी भी कार्य को करने के मायने प्रत्येक व्यक्ति के विभिन्न हो सकते हैं. अजमीड़ जयंती को मनाने के मायने जो में समझता हूँ उसे आप सभी के साथ बाँटना चाहता हूँ इसलिए ये ब्लॉग लिख रहा हूँ. 
हम सभी कल देखेंगे की बड़े बड़े संगठनों द्वारा अजमीड़ जयंती मनाई जाएगी और हजारो की संख्या में स्वर्णकार बंधू एकत्रित होंगे ,कलश यात्राएं निकाली जाएँगी, मंचो से बड़े बड़े उद्बोधन सुनने को मिलेंगे, भामाशाहो द्वारा बड़ी बड़ी घोषणाएं की जाएँगी, प्रतिभाओं का सम्मान किया जायेगा, रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जायेगा और अंत में भोजन प्रसादी के साथ कार्यक्रम समाप्त हो जायेगा. आप क्या सोचते हैं क्या यही मायने हैं अजमीड़ जयंती मानाने के. में शायद कुछ और सोचता हूँ. जब बड़े बड़े बैनरों पर लिखा जायेगा श्री मेध क्षत्रिय स्वर्णकार  समाज ......... द्वारा आयोजित अजमीड़ जयंती समारोह........ तो यह सोचकर मेरे मन में पहेले से ही कुछ प्रश्न उठ रहे हैं. ऊपर लिखे वाक्य में चार बड़े ही महत्पूर्ण प्रश्न छिपे हैं, जो की उन चार स्तम्भो  की भांति है  जो हमारे स्वर्णकार समाज की इमारत को सहेजे हुए हैं. यदि इन चार प्रश्नों के उत्तर विभिन्न संगठन अजमीड़ जयंती के माध्यम से आम जन तक पंहुचा सके तो अजमीड़ जयंती के आयोजन की सार्थकता है अन्यथा ये सिर्फ एक निरूध्येश्य कार्यक्रम ही साबित होंगे. ये चार प्रश्न हैं :
१. महाराजा अजमीड़ कोन थे
२. हम मेढ़ कैसे कहलाये 
३. हम क्षत्रिय कैसे हुए 
४. स्वर्नकारी कार्य करने वाली तो बहुत सी जातियां हैं किन्तु मेढ़ जाती ही स्वयं को शुद्ध स्वर्णकार क्यूँ मानती है अर्थात हम स्वर्णकार कैसे हुए

बड़े दुःख की बात है हर वर्ष अजमीड़ जयंती का आयोजन करने वाली अधिकांश संस्थाओं के पदाधिकारियों तक को उक्त सवालो के जवाब पता नहीं हैं तो क्या वे इनका जवाब आम व्यक्ति तक पंहुचा पाएंगे, क्या उनका कर्त्तव्य नहीं है की वे जिस समाज की सेवा का बीड़ा अपने कंधो पे उठाये हैं कम से कम अपने समाज के इतिहास की तो जानकारी कर ले और समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इस जानकारी को सही रूप में पहुचाएं.  उन्हें बताएं की महाराजा अजमीड़ महाप्रतापी राजा हुए जिन्होंने हस्तिनापुर पर राज्य किया, और मेढ़ जाती महाराजा अजमीड़ की वंशज है , वह जाती जिसने लम्बे समय तक इर्रान में मीडिया पर शाशन किया और निरंतर युद्ध करने के कारन  हम क्षत्रिय कहलाये, चूँकि सदेव तो युद्ध नहीं होते हैं अत मेढ़ क्षत्रिय जाती स्वर्नकारी कार्य में भी सिद्धहस्थ थी, हम विश्व के सर्वश्रेठ कलाकार हैं  आदि आदि अनेकों बातें  जो हमें गोरवान्वित करती हैं और सुशोबित करती हैं, एक स्वर्णकार के रूप में. 
जरा सोचिये आज कितने समाज बंधू महाराजा अजमीड़ के विषय में जानकारी रखते हैं, कितने समाज बंधुओ ने महाराजा अजमीड़ का चित्र अपने घरो या व्यवसाय स्थालो पर लगाया हुआ है, आप मालूम  करने का प्रयास कीजीए या स्वयं से ही पूछ लीजीये, बड़े आश्चर्यजनक परिणाम सामने आयेंगे और बड़े दुखद भी. हम जो भी कार्य करते हैं जब तक उस कार्य के उद्देश्य उसकी संकल्पना के साथ मेल नहीं खायेंगे तब तक उस कार्य की सफलता सुनिश्चित नहीं की जा सकती है. 
कारण अनेक हैं जिनकी वजह से हमारे समाज का असली और व्यापक चेहरा कही बहुत पीछे छूट गया है और समाज के सभी सद्श्यों को उनकी पहचान और सरोकारों से अवगत कराना बहुत आवश्यक है. ताकि वे पहचान सके अपने वजूद को. इसलिए मेरा समाज के सभी बंधुओ से निवेदन है , विशेषकर उनसे जिन्होंने सामाजिक संगठनों की स्थापना कर समाज सेवा का बीडा उठाया है  की  यदि समाज को आगे बढाना है तो पहेले आधार मजबूत कीजीये. तो समाज बंधू स्वयं आगे आयेंगे आपका इस सद्कर्म में साथ देने के लिए.
जय अजमीड़ जय भारत !

उमेश कुमार सोनी 
संयुक्त सचिव, स्वर्णकार समाज उत्थान संघ 
9314405401

Friday, September 16, 2011

Honouring of Teachers Programme - Swarnkar Samaj Utthan Sangh




जयपुर, 5 सितम्बर। यह सर्वविदित है कि किसी भी देश के विकास में उस देश की शिक्षा व्यवस्था का योगदान सर्वाधिक होता है। अत: विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले शिक्षकों का स्थान सर्वथा सर्वोच्च है। इसीलिए कहा गया है-
गुरुब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुदेवो महेश्वर:।
गुरु: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नम:॥
अत: देश की भावी पीढ़ी के सकारात्मक निर्माण में सबसे अहम भूमिका निभाने वाले गुरूजनों का सम्मान ईश्वर की अराधना के समकक्ष है। इसी उद्देश्य से स्वर्णकार समाज-उत्थान संघ द्वारा दिनांक 05 सितम्बर, 2011 को शिक्षक दिवस पर "Multimedia : A Tool for 21st century teachers" पर व्याख्यान तथा शिक्षक सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत जयपुर शहर में स्थित विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में कार्यरत स्वर्णकार समाज के शिक्षकों (विशेषकर उच्च शिक्षा में कार्य कर रहे शिक्षकों को) को आमंत्रित कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान चैम्बर भवन, जयपुर के मोहनलाल सुखाडिया सभागार में किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ माँ सरस्वती एवं महाराजा अजमीढ़ की प्रतिमा के समक्ष पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम के मंचस्थ अतिथियों में श्रीमान् राकेश वर्मा (आई.ए.एस.)-प्लानिंग विभाग राजस्थान सरकार, श्रीमान् फतेहचंद सोनी-से.नि. आई.पी.एस. अधिकारी, श्रीमान् हनुमान सहाय सोनी, प्रबंध निदेशक, पिंकसिटी बिल्डर्स एवं कोलोनाईजर्स तथा मुख्य वक्ता प्रो. पी. एल. स्वर्णकार-से.नि. प्रोफेसर बोटनी विभाग राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सर्वप्रथम श्री कैलाशचंद सारडीवाल द्वारा मंचस्थ अतिथियों का परिचय कराया गया एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। इसके पश्चात् श्री श्याम आर्य द्वारा स्वर्णकार समाज उत्थान संघ की संकल्पना पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में जयपुर के विभिन्न अकादमिक कॉलेजों, इंजीनियंरिंग कॉलेजों तथा विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत स्वर्णकार शिक्षकों ने अति-उत्साह के साथ भाग लिया। इस कार्यक्रम को लेकर गत माह से ही समाज बंधुओं तथा आमंत्रित शिक्षकों में विशेष उत्साह था। कार्यक्रम में स्वर्णकार समाज का अद्भुत शैक्षिक समागम देखने को मिला। सभी ने मुक्त कण्ठ से कार्यक्रम के भाव, उद्देश्य एवं व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. पी.एल.स्वर्णकार ने कहा कि आज भी शिक्षक चॉक एवं टॉक के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा दे रहे हैं। जबकि आज का युग सूचना प्रौद्योगिकी का युग है तथा आज का विद्यार्थी लैपटॉप, कम्प्यूटर, इंटरनेट, आई-पॉड, 3जी मोबाईल, ऑन-लाइन सेवाओं आदि का उपयोग करना जानता है, ऐसे में शिक्षकों को स्वयं को अपडेट करने की आवश्यकता है, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब शिक्षक स्वयं को तकनीकी के क्षेत्र में अपने विद्यार्थियों से भी पिछड़ा महसूस करेगा।
कार्यक्रम में श्री राकेश वर्मा ने कहा कि स्वर्णकार समाज में इस प्रकार के आयोजनों की अत्यधिक आवश्यकता है। जब तक हमारा समाज शिक्षा से नहीं जुड़ेगा तब तक किसी भी प्रकार के विकास की कल्पना करना संभव नहीं है।
श्री हनुमान सहाय सोनी ने अपने वक्तव्य में कहा कि जयपुर में समाज के शैक्षणिक संस्थान की अत्यधिक आवश्यकता है और इस दिशा में अवश्य ही कोई कदम उठाकर इस संकल्पना को साकार रूप दिया जाना अपेक्षित है।
श्री फतेहचंद सोनी ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वर्णकार समाज अभी भी शिक्षा की कमी से जूझ रहा है और हमारे समाज के पिछडेपन का मुख्य कारण शिक्षा का अभाव होना है। अत: हमारे समाज को शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने हेतु विशेष प्रयासों की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में जयपुर के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में कार्यरत लगभग 20 शिक्षकों (सेवानिवृत्त शिक्षकों का भी) का सम्मान किया गया। जिसमें डॉ. आर.एस.वर्मा, श्री हीरालाल मैढ़, प्रो. पी.एल.स्वर्णकार, डॉ. बद्रीलाल सोनी, प्रो. श्यामलाल सोनी, डॉ. ओ.पी.जौहरी, डॉ. विनीत सोनी, डॉ. शारदा सोनी, डॉ. विजय सोनी, श्री सुरेन्द्र सोनी, सुश्री समता सोनी, श्री ज्ञानेश सोनी, सुश्री इंदुलता सोनी, श्री नरेश सोनी, श्री विनोद सोनी, श्री जगदीश सोनी, डॉ. पंकज सोनी, श्री नरेन्द्र सोनी, सुश्री शोभा सोनी, श्री उमेश कुमार सोनी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाज के अनेक प्रतिष्ठित बंधुआें ने भाग लिया और आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। कार्यक्रम के अन्त में श्री कैलाशचंद सारडीवाल द्वारा उपस्थिति शिक्षकों एवं अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में मंच संचालन योगेश सोनी ने किया तथा कार्यक्रम के संयोजक उमेश कुमार सोनी रहे। कार्यक्रम के अन्त में रात्रि भोज का आयोजन किया गया जिसके अन्तर्गत स्वर्णकार समाज उत्थान संघ के अध्यक्ष गजेन्द्र सोनी ने सभी आगन्तुक अतिथियों को व्यक्तिश: मिलकर धन्यवाद दिया तथा संगठन के समस्त कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम की सफलता के लिए बधाई दी। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं की दृष्टि से ज्वैलर्स व्यापार मण्डल के महामंत्री श्री ताराचंद सोनी का योगदान सराहनीय रहा।

(उमेश कुमार सोनी)
कार्यक्रम संयोजक


Wednesday, July 13, 2011

Compulsion of Hallmarking : Is it Fair in India


२२ मार्च, २॰११ को सरकार द्वारा BIS Amendment Bill 2011 पेश कर बताया गया है कि अन्य उत्पाद के साथ सोने पर हॉलमार्क अनिवार्य किया जाए, अभी ७७ आइटम पर हॉलमार्क  BIS Act के तहत लागू होना बताया गया है। केन्द्रीय सरकार द्वारा हाल ही में BIS Act. 1986 की धारा १४ में संशोधन किया जा रहा है जिसमें अनिवार्य रूप से हॉलमार्क को लागू करना होगा, ऐसी स्थिति में प्रत्येक ज्वैलरी व्यापारी एवं स्वर्णकार भाईयों के मूल व्यवसाय पर कठिनाइयाँ, परेशानियाँ पैदा हो जायगी और वह अपना व्यवसाय सुचारू रूप से कर ही नहीं पायेगा। स्वर्णकारी व्यवसाय से आज पूरे देश में लाखों-करोडों लोग जुडे हुए हैं जिनमें से अधिकांशतः व्यापारी कम शिक्षित हैं। अतः इसे कानून की परिधि में आने से रोकना आवश्यक है उसके लिए पूरे देश के स्वर्णकार भाईयों एवं इस पशे से जुडे व्यक्तियों को पूरी एकता के साथ केन्द्रीय नेतृत्व से जुडकर विरोध प्रदर्शन करना होगा। ये विचार ज्वैलर्स व्यापार मण्डल (समिति) शास्त्री नगर की आमसभा की बैठक में श्रीमान् ओ.पी.आर्य, एडवोकेट, राजस्थान उच्च न्यायालय (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भारतीय स्वर्णकार समाज, नागपुर एवं राष्ट्रीय विधि सचिव, अखिल भारतीय स्वर्णकार समाज, नई दिल्ली) ने व्यक्त किए।
ज्वैलर्स व्यापार मण्डल (समिति) शास्त्री नगर की आम सभा की बैठक दिनांक ॰८ जुलाई, २॰११ को सोनी कॉम्पलैक्स, शास्त्री नगर में आयोजित की गई। बैठक का शुभारम्भ महाराजा अजमीढ के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्जवलित कर किया गया। बैठक की अध्यक्षता व्यापार मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला वर्मा (पूर्व पार्षद) ने की। कार्यक्रम में स्वर्णकारी व्यवसाय में आ रही कठिनाईयों के स्थाई हल हेतु चर्चा की गई। ज्वैलर्स व्यापार मण्डल के महामंत्री ताराचंद सोनी ने अपने उद्बोधन में विशेष रूप से धारा ४११ व ४१२ से उत्पन्न समस्याओं के निवारण पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता जताई तथा संगठन की एकता को बनाये रखने एवं संगठन को मजबूती प्रदान करने का आह्वान किया। बैठक में सर्वसम्मति से सरंक्षक पद हेतु श्री रामस्वरूप सोनी को मनोनीत किया गया। बैठक में ज्वैलर्स व्यापार मण्डल (समिति) शास्त्री नगर के वार्षिकोत्सव को अगस्त माह में मनाये जाने की रूपरेखा तैयार की गई। कार्यक्रम में ज्वैलर्स के व्यापार मण्डल के उपाध्यक्ष-रामावतार सोनी, रवि सोनी, संजय सोनी, बाबूलाल सोनी, संगठन मंत्री-सुरेन्द्र सोनी, सह-संगठन मंत्री-ओमशिवशंकर सोनी, कोषाध्यक्ष-विमलेश सोनी, प्रचार मंत्री-गोपाल सोनी, सह-प्रचार मंत्री-मधुसूदन सोनी, कार्यलय मंत्री-अनिल सोनी सहित समस्त कार्यकारिणी सदस्य एवं ज्वैलर्स व्यापार मण्डल (समिति) शास्त्री नगर के स्वर्णकारी पेशे से जुडे व्यापारी बंधु उपस्थित रहे।


ताराचंद सोनी
महामंत्री