Tuesday, July 1, 2014


Honouring of Student and Scholarship Distribution Programme
स्वर्णकार समाज का प्रतिभा सम्मान एवं छात्रवृत्ति वितरण समारोह सम्पन्न
जयपुर, 29 जून। सत्र 2013-14 में राजस्थान में संचालित विभिन्न शिक्षा बोर्डों द्वारा आयोजित वार्षिक परीक्षाओं में राज्य एवं जिला स्तर पर स्वर्णकार समाज के मेरिट में आने वाले विद्यार्थियों एवं उच्च शिक्षा में अध्ययनरत् विद्यार्थियों हेतु प्रतिभा सम्मान एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम का आयोजन गत वर्षों की भाँति इस वर्ष भी स्वर्णकार समाज उत्थान समिति, जयपुर द्वारा महाराणा प्रताप सभागार, भारतीय विद्या भवन विद्याश्रम, जेएलएनमार्ग, जयपुर में सम्पन्न किया गया। कार्यक्रम में आवश्यकता आधारित विद्यार्थियों को भी छात्रवृत्तियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डा. जितेन्द्र कुमार सोनी, सीईओ, ज़यपुर जिला परिषद् द्वारा उपस्थित विद्याथियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् आपका कैरिऍर प्रारम्भ हुआ है। यदि आप अपने जीवन में सफलता अर्जित करना चाहते हैं तो अपना एक लक्ष्य बनाईए और उसे पूर्ण करने हेतु जुट जाइए। न्होंने कहा जब एक बच्चा अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर अपने माता-पिता से प्रथम बार मिलता है तो उनकी ऑंखों से बहने वाली खुशी की दो बूंदों का महत्व अनमोल है। हमारे जीवन को साकार बनाने में हमारे माता-पिता का सर्वाधिक योगदान है। आपको शिक्षित होकर और जीवन में ऊँचाईयाँ प्राप्त कर उनके द्वारा हमारे लिए गए प्रयत्नों को साकार करना है। कार्यक्रम के अध्यक्ष जगदीश जौहरी, ट्रस्टी सचिव, रामगढ़ विकास ट्रस्ट, सीकने महिलाओं के स्वावलम्बन हेतु उन्हें प्रशिक्षित कर विभिन्न लघु एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना कर एवं वर्तमान में संचालित ऐसे प्रकल्पों के माध्यम से उन्हें स्वरोजगार हेतु आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रो श्याम लाल सोनी, प्रोफेसर, एमएनईटी, ज़यपुर ने बालकों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर अपने परिवारजन, समाज एवं देश को अग्रणी बनाने की प्रेरणा प्रदान की। अन्य विशिष्ट अतिथि श्रीमती विद्योत्तमा वर्मा, सेनि ज़िला शिक्षा अधिकारी, जोधपुर ने शिक्षा के संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के संदेश को सुनाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि, 'शिक्षा ऐसी दी जाए जो विद्यार्थी भारत और भारतीय धर्म के प्रति विश्वास और श्रद्धा रखे, निर्भय होकर राष्ट्र के प्रति अपनेर् कत्तव्य का भली-भाँति निर्वाह कर सकें।' आगे अपने उद्बोधन में उन्होंने महिला शिक्षा एवं सशक्तिकरण पर बल देते हुए इस संदर्भ में अपना पक्ष प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जगदीश प्रसाद जांगलवा, जेएमज़े ज्वैलर्स, वैशाली नगर, जयपुर ने संस्था द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम में 14 मेरिट स्कॉलर्स (कु क़िरण सोनी-पाली, कु पूनम सोनी-चुरू, शिवम सोनी-चित्तौड़गढ़, कु मोनिका सोनी-उदयपुर, रितेश सोनी-झुंझुनू, कु प्रज्ञा सोनी-टोंक, कु शुभांगी सोनी-साखून, जयपुर, कु लविका सोनी-अलवर, कु अनुष्का स्वर्णकार-टोंक, कु योगिता सोनी-जयपुर, कु अंजली सोनी-जयपुर, हेमन्त कुमार सोनी-झुंझुनू, मनवय सोनी-कोटा, श्रीमती गीता सोनी-जयपुर½ को 5100.00 रुपये प्रति विद्यार्थी तथा 40 आवश्यकता आधारित प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उनके गत कक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर 5100.00 रुपये प्रतिछात्र छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान किए गए। साथ ही उच्चतर शिक्षा में अध्ययनरत् 38 विद्यार्थियों (डॉ शीष सोनी-जयपुर, प्रवीण कुमार स्वर्णकार-जयपुर, नीरज कुमार-जयपुर, राकेश सोनी-पाली, ईशान सोनी-जयपुर, दुष्यन्त सोनी-झुंझुनू, विवेक सोनी-बीकानेर, कविता सोनी-सीकर, भूपेन्द्र सोनी-जयपुर, अदिती सोनी-जयपुर, अंशुल सोनी-जयपुर, मोहित कुमार सोनी-भरतपुर, कुसुम सोनी-जयपुर, अभिषेक सोनी-जयपुर, अभिषेक कुमार-जयपुर, नीतेश सोनी-सीकर, संदीप सोनी-जयपुर, आदित्य सोनी-अलवर, आदित्य आर्य-जयपुर, आयुषी सोनी-सीकर, स्वाति सोनी-सीकर, मोहित सोनी-जयपुर, गुंजन सोनी-जयपुर, संदीप कुमार सोनी-जयपुर, दीपक सोनी-जयपरु, तुषार सोनी-जयपुर, आशा सोनी-जयपुर, रविप्रकाश सोनी-जयपुर, श्रेया सोनी-कोटा, शीतल सोनी-जयपुर, हिमांशु सोनी-झुंझुनू, पुलकित सोनी-जयपुर, अंकित सोनी-जयपुर, शिल्पा सोनी-जयपुर, अंकित सर्राफ-झुंझुनू, प्रशान्त कुमार स्वर्णकार-जयपुर, रिया सोनी-जयपुर, रितिका सुगन्धा-जयपुर) को तथा कार्यक्रम में छात्रवृत्ति हेतु एवं अन्य व्यवस्थाओं में आर्थिक सहयोग करने वाले 39 दान-दाताओ (श्री अम्बालाल स्वर्णकार-केकड़ी अजमेर, श्री अनिल सोनी दौसोल्या-जयपुर, श्री बाबूलाल सोनी कूकरा-जोधपुर, श्री भवानीशंकर 'कुसुम'-जयपुर, श्री दामोदर स्वर्णकार बैराडिया-जयपुर, श्री दीपक सोनी जंवडा-जयपुर, श्री हनुमान सहाय सोनी खोवाल-जयपुर, श्री जे क़े सोलीवाल-जयपुर, श्री कैलाशचन्द सारड़ीवाल-जयपुर, श्री कैलाश सर्जनवाल-जयपुर, श्री लखन अग्रोया-जोधपुर, श्री मधुसूदन सोनी-जयपुर, श्री मनोज मौसूण-जयपुर, श्री मातादीन कठराथला-जयपुर, श्री नाथूलाल तोषावड़-सीकर, श्री निखिल थूणगर-जयपुर, श्री ओमप्रकाश सोनी-जयपुर, श्री प्रदीप जौहरी-जयपुर, श्री प्रहलाद सोनी-जयपुर, डॉ अारज़ेवर्मा-यूक़े, श्री रविन्द्र रोड़ा-जयपुर, श्री ऋद्धिकरण सोनी 'वीरेश'-जोधपुर, श्री सागरमल नारनौली-जयपुर, श्री संजय कुमार सोनी-जयपुर, श्रीमती सीमा वर्मा-जयपुर, श्री शिवराज सोनी-जयपुर, श्री अजमीढ़ सेवा संस्थान-जयपुर, श्री श्रीराम सोनी-पश्चिम बंगाल, श्री सूरज सोनी-जयपुर, श्रीमती विद्योत्तमा वर्मा देवाल-जोधपुर, श्री विजय जालू-जयपुर, श्री विजयराज सोनी-जयपुर, श्री वीरेन्द्र कुमार सोनी-जयपुर, श्री बाबूलाल सोनी-सीकर, श्री राजेश सोनी (सीए)-ज़यपुर, श्री फतेहचंद सोनी (सेनि ईपीएस)-ज़यपुर, श्री विजय स्वर्णकार-कोटा, श्रीमती रेणुका वर्मा-जयपुर, श्री निरंजन सोनी-जयपुर, श्री रमेशचंद सुनालिया-जयपुर, श्री जय कुमार जौहरी-जयपुर, श्री हरिकिशन सोनी-जयपुर, श्री राधेश्याम भांवर-जयपुर, श्री मोहनलाल सहदेव-जयपुर, श्री अनिल सारड़ीवाल-जयपुर, श्री राजेन्द्र कठराथला-जयपुर, श्री सुभाषचंद सोनी आगरावाले-जयपुर, डॉ बजरंग लाल सोनी-जयपुर, डॉ प्रभा वर्मा-जयपुर, श्री सौम्य वर्मा-सेंट लुईस, यूएसए, श्री जगदीश प्रसाद जांगलवा-जयपुर, श्री जगदीश जौहरी-रामगढ़ शेखावाटी सीकर½ को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में स्वर्णकार समाज का प्रबद्ध वर्ग, विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, समाज सेवी, व्यवसायी वर्ग, बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग काफी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
कार्यक्रम में सर्वप्रथम मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती और महाराजा अजमीढ़ के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इसके पश्चात् मंचासीन अतिथियों का परिचय संस्था के सचिव योगेश कुमार सोनी द्वारा करवाया गया तथा सभागार के उपस्थिति प्रबुध्दजन द्वारा मंचासीन अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। इसके पश्चात् कु. सुरभि सोनी द्वारा सरस्वती वन्दना हेतु नृत्य प्रस्तुत किया। संस्था का परिचय संस्था के परामर्शद एवं राजस्थान पत्रिका के मुख्य उपसम्पादक श्री एम. डी. सोनी द्वारा करवाया गया। इसके पश्चात् संस्था के परामर्शद् डॉ. गुंजन सोनी (आर.ए.एस.) द्वारा कार्यक्रम के उद्देश्य एवं रूपरेखा पर बडे ही प्रभावी ढंग से प्रकाश डाला गया। इसके पश्चात् श्रीमती रितु सोनी द्वारा मेरिट प्राप्त विद्यार्थियों के अभिनन्दन का कार्य पूर्ण कराया गया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा में अध्ययनरत् विद्यार्थियों के अभिनन्दन हेतु संचालन संस्था के संगठन मंत्री सागर सोनी द्वारा किया गया। छात्रवृत्ति तथा कार्यक्रम की अन्य व्यवस्थाओं में आर्थिक सहयोग प्रदान करने वाले दानदाताओं/भामाशाहों के अभिनन्दन हेतु संचालन संस्था के संयुक्त सचिव एवं कार्यक्रम संयोजक उमेश कुमार सोनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अन्त में संस्था के अध्यक्ष गजेन्द्र सोनी अतिथियों तथा समाज बंधुओं का धन्यवाद ज्ञापन किया। संस्था के सदस्य मनोज कुमार सोनी द्वारा सूचनाएँ प्रेषित की गईं। मंच संचालन श्रीमती इंदुलता सोनी द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के सफल संचालन में संस्था के सभी सदस्यों का अभूतपूर्व सहयोग रहा। कार्यक्रम में स्वर्णकार समाज का प्रबद्ध वर्ग, विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, समाज सेवी, व्यवसायी वर्ग, बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग काफी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

Sunday, May 11, 2014

Release of "Maidh Kshatriya Vansh Ke Gotra Evam Kuldeviyan' Epic


मैढ़ क्षत्रिय वंश के गोत्र एवं कुलदेवियाँ ग्रन्थ 
विमोचन कार्यक्रम सम्पन्
जयपुर, 11 मई। स्वर्णकार समाज उत्थान समिति, जयपुर द्वारा रविवार को जयपुर स्थिति पिंकसिटी प्रेस क्लब सभागार में ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्रीमान् रामनारायण सोनी, लाडनू, नागौर जिनके द्वारा पूवमें 'मैढ़ क्षत्रिय जाति का इतिहास' ग्रन्थ का लेखन कार्य पूर्ण किया गया था। इनके द्वारा गत 6-7 वर्षों के अथक प्रयास एवं शोधपरक कार्य करते हुए 'मैढ़ क्षत्रिय वंश के गोत्र एवं कुलदेवियाँ' ग्रन्थ का लेखन कार्य पूण्र किया गया है। इस ग्रन्थ की प्रकाशक संस्था स्वर्णकार समाज उत्थान समिति, जयपुर है। प्रकाशन संस्था के रूप में समिति द्वारा 'मैढ़ क्षत्रिय वंश के गोत्र एवं कुलदेवियाँ' ग्रन्थ का विमोचन कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न कियगया।
ग्रन्थ का विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमान् राजेन्द्र राठौड़-चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, राजस्थान सरकार, कार्यक्रम अध्यक्ष श्रीमान् मातादीन सोनी-महामंत्री सर्राफा ट्रैडर्स कमेटी, जयपुर, मुख्य वक्ता प्रोफहरिशकर पाण्डेय-अधिष्ठाता, श्रमणा विद्या संकाय, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी, उप्र, ग़्रन्थ के रचयिता श्रीमान् रामनारायण सोनी-लाड़नू नागौर, विशिष्ट अतिथि श्रीमान् सतीश सोनी-अध्यक्ष, मुण्डाधाम मंदिर, हनुमानगढ़ के कर-कमलों से किया गया। विमोचन के समय संस्था के सदस्य एवं परामर्शदाता मण्डल के उपस्थित सदस्य भी मंच पर उपस्थित रहे।
सर्वप्रथम मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती एवं महाराजा अजमीढ़ के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों का परिचय संस्था के संयुक्त सचिव एवं कार्यक्रम संयोजक उमेश कुमार सोनी द्वारा करवाया गया। अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न द्वारा अभिनन्दन संस्था के सचिव योगेश कुमार सोनी एवं उपाध्यक्ष संजय सोनी द्वारा किया गया। संस्था का परिचय संदीप सोनी द्वारा एवं कार्यक्रकी रूपरेखा हितेशचन्द्र स्वर्णकार द्वारा प्रेषित की गई। तत्पश्चात् कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो हरिशंकर पाण्डेय जिनके सतत् मार्गदर्शन में उक्त ग्रन्थ का लेखन कार्य पूर्ण किया गया है, के द्वारा अपने वक्तव्य में सर्वप्रथम गोकी परिभाषा, अर्थ एवं महत्व पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला गया। इसके पश्चात् आपके द्वारा कुलदेवियाँ की महिमा का अद्भुत वर्णन किया गया। जिसके अन्तर्गत शिव एवं शक्ति की प्राचीन अवधारणा से सभी को अवगत कराया गया। आपने इस ग्रन्थ के लेखन के संबंध में श्रीमान् रामनारायण सोनी की निष्ठा, श्रम एवं दृढ़ निश्चय तथा ग्रन्थ लेखन की सम्पूर्ण यात्रा का संस्मरण उपस्थित समाजजन के समक्ष रखा। आपने बताया कि इस प्रकार के कार्य समाज को स्थाई गति प्रदान करते हैं और समाज को स्व की पहचान कराने हेतु श्रीमान् रामनारायण सोनी द्वारा किया गया प्रयास अत्यन्त सारगर्भित एवं सराहनीय है। इसके पश्चात् विशिष्ट अतिथि श्रीमान् सतीश सोनी द्वारा ग्रन्थ के लेखक महोदय के कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई एवं इन्हें हार्दिक बधाई प्रेषित की गई।
कार्यक्रम की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए श्रीमान् रामनारायण सोनी ने अपने उद्बोधन में ग्रन्थ के छ: अध्यायों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। जिसमें क्रमश: प्रथम अध्याय में शिव एवं शक्ति की व्याख्या की गई द्वितीय अध्याय में देवी की महिमा का वर्णन किया गया है। तृतीय अध्याय में राजस्थान में कुलदेवयिां एवं शक्ति स्थल का विस्तृत वर्णन किया गया है। चतुर्थ अध्याय में राजपूत जाति के प्रमुख राजवंशों का वर्णन है। पंचम अध्याय में गोत्र की व्याख्या, महत्व एवं ऐतिहासिक परिदृश्य को उजागर किया गया है तथा अंतिम षष्ठम अध्याय में मैढ़ जाति के गोत्रों का वर्णन किया गया है। अन्त में संदर्भ ग्रन्थ सूची के अन्तर्गत ग्रन्थ के लेखन हेतु प्रयोग में लिए गए संदर्भों का उल्लेख किया गया है।
इनके उद्बोधन के पश्चात् मंचासीन अतिथियों द्वारा ग्रन्थ का विमोचन किया गया। तत्पश्चात् संस्था द्वारा श्रीमान् रामनारायण जी सोनी का अभिनन्दन किया गया। जिसके अन्तर्गत श्रीमान् जगदीश जी जौहरी रामगढ़ शेखावाटी द्वारा माल्यार्पण, श्रीमान् श्याम आर्य, अतिरिक्त राजकीय महाधिवक्ता राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा साफा एवं शॉल ओढ़ाया गया तथा डॉ मेहरसिंह सोनी द्वारा अभिवन्दन पत्र भेंट किया गया। इससे पूर्व संस्था की सदस्या श्रीमती सुरभि सोनी द्वारा अभिवन्दन पत्र का वाचन किया गया। इसी क्रम में विभिन्न जिलों से पधारे समाजबंधुओं द्वारा श्रीमान् रामनारायण सोनी को प्रशस्ति-पत्र, शॉल, पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिश्रीमान् राजेन्द्र जी राठौड़ द्वारा अपने उद्बोधन में लेखक के कार्य मुक्त कण्ठ से प्रशंसा की। उन्होंने भी इस बात पर बल दिया कि समाज को आगे तभी बढाया जा सकता है जबकि समाज स्वयं के इतिहास, संस्कारों, परम्पराओं, रीति-नीतियों से परिचित हो। स्व की पहचान रखता हो। आपने लेखक एवं आयोजक संस्था को साधुवाद प्रेषित किया।
इसके पश्चात् संस्था परामर्शद् श्रीमान् हनुमान सहाय सोनी द्वारा श्रीमान् रामनारायण सोनी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर बड़े ही तथ्यात्मक ढंग से प्रकाश डाला गया। आपने बताया कि श्रीमान् रामनारायण सोनी ने किस प्रकार अत्यधिक परेशानियों का सामना करते हुए भी अपने दृढ़ विश्वास एवं समाज सेवा भाव के फलस्वरूप इस कार्य को सम्पन्न किया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रीमान् मातादीन जी कठाथला द्वारा समाज में विघटन की स्थिति पर दु:ख व्यक्त करते हुए समाज को एक करने हेतु प्रयासों को गति देने की बात कही और संस्था तथा लेखक को इनके सार्थक प्रयासों हेतु बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
कार्यक्रम के अन्त में जयपुर नगर निगम के भाजपा पार्षद एवं संस्था के सदस्य शिवकुमार सोनी द्वारा कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्रेषित की गईं। इसके पश्चात् संस्था अध्यक्ष गजेन्द्र सोनी द्वारा सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम में मंच संचालन श्रीमती इन्दूलता सोनी एवं संस्था के संगठन मंत्री सागर सोनी द्वारा किया गया। अन्त में देशभर से पधारें हुए समाजजन ने सप्रेम दोपहर भोजन प्राप्त किया गया।





Sunday, April 6, 2014

 

स्वर्णकार लोकसेवक वेलफेयर सोसायटी (रजि). द्वारा कैरीऍर फेयर एवं
स्नेह मिलन कार्यक्रम सम्पन्न्र
जयपुर, 30 मार्च। स्वर्णकार लोकसेवक वेलफेयर सोसायटी (रजि). द्वारा समाज के माध्यमिक एवं उच्च स्तर (कक्षा 9 से अधिक) पर अध्ययनरत् विद्यार्थियों की कैरीऍर संबंधी जिज्ञासाओं एवं समस्याओं के समाधान हेतु ''कैरीर फेयर'' का आयोजन दिनांक 30 मार्च को मानसरोवर, जयपुर स्थिति दीप इंटरनेशनल कॉलेज में किया गया। इस कार्यक्रम के  अन्तर्गत शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को स्वर्णकार समाज के संबंधित क्षेत्र में कार्यरत एवं अनुभव रखने वाले प्रोफेशनल समाजबंधुओं द्वारा शिविर में प्रत्यक्ष काउन्सलिंग कर मार्गदर्शन प्रदान किया गया। जिसका लाभ विद्यार्थी अपने शैक्षिक एवं व्यावसायिक उन्नयन हेतु कर सकेंगे।
कार्यक्रम के अन्तर्गत समाज के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत अग्रांकित प्रबुध्दजन का मार्गदर्शन विद्यार्थियों को काउन्सिलिंग हेतु प्राप्त हुआ-इंजीनियरिंग-डॉ. गुंजन सोनी-प्रोफेसर, एम.एन.आई.टी., डॉ. शारदा सोनी-प्रोफेसर, एस.के.आई.टी. इंजीनियरिंग कॉलेज, जयपुर, मेडिकल-डॉ. ताराबाबू सोनी-प्रोफेसर, नेत्र विभाग, एस.एम.एस. मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय, डॉ. सुरेश सोनी-उपनिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, डॉ. बजरंग लाल सोनी- वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ, डॉ. रेखा सोनी-वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ, डॉ. विकास सोनी-चिकित्सक, फोर्टिस हॉस्पीटल, जयपुर, प्रशासनिक क्षेत्र-श्री जितेन्द्र सोनी (आई.ए.एस.), श्री गौरव सोनी, अजमेर, विधि-श्री श्याम आर्य-अति. राज. महाअधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय, श्री ओ.पी.आर्य, अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय, सुश्री डिम्पल स्वर्णकार-अधिवक्ता राजस्थान उच्च न्यायालय, सी.ए./सी.एस-&aश्री सुशील सोनी-चाटर्ड अकाउंटेंट, मेनेजमेंट-श्री चैतन्य स्वर्णकार-प्रबंधन विशेषज्ञ, शिक्षा-श्रीमती सुरभि सोनी-प्रवक्ता, सिध्दीविनायक कॉलेज, जयपुर, इंफॉर्मेशन टैक्नोलॉजी-सुश्री योगिता सोनी, आई.टी. विशेषज्ञ, मीडिया एण्ड जर्नलिज्म-डॉ. सुधीर सोनी-प्रोफेसर, हिन्दी विभाग, राजकीय महाविद्यालय चिमनपुरा जयपुर, फाइन आर्ट्स-श्री सुरेन्द्र सोनी-प्रवक्ता गर्ल्स पॉलीटेक्निक कॉलेज जयपुर, श्री गिरिराज सोनी-प्रवक्ता, ज्वैलरी-श्री संजय सोनी, शांति ज्वैलर्स जयपुर, बैंकिंग एण्ड इंश्योरेंस-श्री गिर्राजशरण स्वर्णकार-प्रबंधक आईसीआईसीआई बैंक, जयपुर, श्री मनोहरलाल सोनी-एल.आई.सी., जयपुर श्रीमती रितु सोनी, सहायक प्रबंधक, यू.बी.आई. जयपुर आदि।
कार्यक्रम का प्रारम्भ अपराह्न 4.00 बजे से किया गया। सर्वप्रथम कार्यक्रम में पधारे सभी महानुभावों ने अपना नि:शुल्क पंजीकरण करवाया। साथ ही काउन्सिलिंग हेतु पधारे विद्यार्थियों से 'एप्टीटयूड इवेल्यूएशन फॉर्म' भरवाया गया। जिसके माध्यम से यह ज्ञात किया गया कि विद्यार्थी की रुचि किस क्षेत्र में अपना कैरीऍर बनाने की है। जिसके अनुसार विद्यार्थी को संबंधित विशेषज्ञ के पास विभिन्न कक्षों में की गई पृथक-पृथक विषयवार व्यवस्था अनुसार भेजा गया। जहाँ विशेषज्ञों द्वारा विद्यार्थियों तथा अभिभावकों को कैरीऍर संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया गया तथा उनकी जिज्ञासाओं को शांत किया गया। सायं 6.00 बजे सामूहिक मंचीय कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। जिसके अन्तर्गत कैरीऍर संबंधी विषय की विभिन्न जानकारियाँ उपस्थित वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं समाजबंधुओं द्वारा प्रदत्त की गईं। जिसके अन्तर्गत प्रमुख रूप से श्री राकेश वर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार, श्री जितेन्द्र सोनी, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जयपुर जिला परिषद्, श्री रामजीलाल सोनी, से.नि. संयुक्त रजिस्ट्रार, सहकारिता विभाग, श्री मनोहरलाल सोनी, सी. डवलपमेंट ऑफिसर, एल.आई.सी. इण्डिया, डॉ. सुरेश सोनी, उपनिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, राजस्थान सरकार, श्री दीप वर्मा, निदेशक, दीप इंटरनेशनल कॉलेज, जयपुर, श्री फतेहचंद सोनी, से.नि. आई.पी.एस., श्री श्याम आर्य, अतिरिक्त राजकीय महाअधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय, श्री श्रीराम मौसूण, अध्यक्ष, सावित्री जनकल्याण ट्रस्ट, कोटड़ी, श्री रमेशचन्द्र सोनी, ए.डी.बी. बैंक, श्री दुलीचंद कडेल] श्री सुशील वर्मा, सी.ए., डॉ. सुधीर सोनी-एसोसिएट प्रोफेसर, राजकीय महाविद्यालय चिमनपुरा, डॉ. बजरंग लाल सोनी-वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ एवं निदेशक, प्रेमलता हॉस्पिटल, जयपुर, संस्था अध्यक्ष प्रो. श्यामलाल सोनी-प्रोफेसर एम.एन.आई.टी. आदि का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। साथ ही श्रीमती मुक्ता वर्मा, निदेशक, इम्पीट्स विजार्ड इंस्टीटयूट द्वारा भी सारगर्भित उद्बोधन दिया गया तथा साथ ही इम्पीट्स विजार्ड इंस्टीटयूट में पीईटी, पीएमटी की तैयारी हेतु अध्ययन के लिए स्वर्णकार समाज के विद्यार्थियों को फीस में 50 प्रतिशत की छूट की घोषणा भी की गई।
इसके पश्चात् जागदूर श्री आर.के.सोनी द्वारा अपनी जादू की विभिन्न विधाओं का हैरतअंगेज प्रदर्शन उपस्थित समाजजन के समक्ष किया गया। जिसे सभी प्रसन्नता एवं आश्चर्य से सरोबार हुए। यह कार्यक्रम उपस्थित बच्चों को बहुत अधिक भाया। जादूगर श्री के हुनर की सभी ने मुक्त कण्ठ से प्रशंसा की और मेजिक शो की प्रस्तुति के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहयोग एवं विभिन्न कार्यों में सहयोग करने वाले सभी समाजबंधुओं का श्री राकेश जी वर्मा, मुख्य संरक्षक द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। अन्त में पधारे हुए महानुभावों ने रात्रि भोज ग्रहण किया। कार्यक्रम में 400 से अधिक समाजबंधुओं जिनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी वर्ग एवं महिला वर्ग सम्मिलित था ने भाग लिया। कार्यक्रम की सफलता में कार्यकारिणी के सभी सदस्यों का पूर्ण सहयोग रहा।

Friday, January 17, 2014

Lecture in the Memory of Late Shri Shyam Lal Verma 'Dharambhushan' 
स्व श्यामलाल वर्मा 'धर्मभूषण' स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम सम्पन्

जयपुर 12 जनवरी। विवेकानंद जयन्ती के सुअवसर पर विद्याधर नगर स्थित बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के 'उत्सव' सभागार में स्वर्णकार समाज उत्थान समिति द्वारा जयपुर से प्रथम दैनिक समाचारपत्र प्रकाशित करने वाले क्रांतिकारी पत्रकार और स्वर्णकार समाज की महान् विभूिस्व श्री श्यामलाल वर्मा 'धर्मभूषण' की स्मृति में व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शरद कृषि (हिन्दी संस्करण, पुणे) के सम्पादक एवं कृषि विपणन बोर्ड के पूर्व संयुक्त निदेशक सुविख्यात पत्रकार डॉ महेन्द्र मधुप उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मालवीय नेश्इंस्टीटयूट ऑफ टैक्नोलॉजी, जयपुर से विभागाध्यक्ष मानविकी विभाग के पद से सेवानिवृत्त प्रोफेसर रविशेखर वर्मा द्वारा की गई। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के निदेशक (अकादमिकडॉ संजय बियानी एवं प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक डॉ विष्णु पंकज रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में ग्रामभारती संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्रीमान् भवानीशंकर 'कुसुम' तथा वानप्रस्थी सामाजिक कार्र्यकत्ता श्रीमानसत्यनारायण कुल्थिया रहे।
      कार्यक्रम का प्रारम्भ मंचासीन अतिथियों द्वारा महाराजा अजमीढ़ एवं स्वामी विवेकानन्द जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं माल्यार्पण द्वारा किया गया। इसके पश्चात् कु क़शिश सोनी द्वारा अतिथियों का तिलक लगाकर स्वागकिया गया एवं संस्था के सदस्य श्री विनोद सोनी एवं श्री संदीप झांगी द्वारा सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न एवं साहित्य भेंट किया गया। जोधपुर से पधारी श्रीमती विद्योत्तमा वर्मा द्वारा स्वामी विवेकानंद पर लिखित पुस्तक को साहित्य के रूप में अतिथियों को भेंट किया गया। मंचस्थ अतिथियों का परिचय कार्यक्रम संयोजक श्री उमेश कुमार सोनी द्वारा करवाया गया। इसके पश्चात् संस्था के सदस्य श्री संदीप सोनी द्वारा संस्था के उद्देश्यों तथसंस्था द्वारा अब तक सम्पन्न किए गए कार्यक्रमाें के संदर्भ में प्रजेन्टेशन प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम की रूपरेखा को संस्था की सदस्या श्रीमती सुरभि सोनी द्वारा अवगत कराया गया। इसके पश्चात् मुख्य वक्ता श्री सत्यनारायण कुल्थिया द्वारा स्व श्री श्यामलाल वर्मा 'धर्मभूषण' के पारिवारिक एवं सामाजिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि स्व वर्मा जी का जन्म ज्येष्ठ कृष्णा 30 सोमवार संवत् 1954, 1 जून 1897 को अजीमगंज जिला मुर्शीदाबाद (बंगाल) में स्व श्री मोतीलाल जी के घर पर हुआ। प्रारम्भ से ही इनकी लेखन, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में रुचि रही। इनका विवाह श्रीमती उमा देवी के साथ सम्पन्न हुआ। इनके दो पुत्र तथा तीन पुत्रियाँ थी। इनके ज्येष्ठ पुत्र का स्वर्गवास हो चुका है तथा ज्येष्ठ पुत्र का परिवार एवं कनिष्ठ पुत्र परिवार सहित जयपुर में निवास कर रहे हैं। आप 1932 में महाराजा भवानीसिंह के जन्म के वर्षभर के समारोहों को देखने जयपुर आए और यहीं बस गए।
आपने बताया कि 12 वर्ष की अल्पायु में ही पंडित सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पडे। 16 वर्ष की आयु में परिवारजन के साथ मथुरा आकर कुन्दन जडाई का पैतृक कार्य सीखने लगे। स्व वर्मा जी हिन्दू महासभा के सक्रिय सदस्य थे। इन्हाेंने महासभा की ओर से चुनाव भी लडा था। स्व वर्मा जी हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान के कट्टर समर्थक थे। 1962 में तात्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए स्र्[1]ा नियंत्रण अधिनियम से सम्पूर्ण देश का स्वर्णकारी कार्य करने वाला वर्ग बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ था। इन विकट क्षणों में स्व वर्मा जी द्वारा अथक प्रयास किए गए और समाज को राहत दिलवाई। स्व वर्मा जी द्वारा जयपुर में मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार सभा की स्थापना की गई थी और आप ही के प्रयासों से जयपुर में स्थित स्वर्णकार कॉलोनी अपने अस्तित्व में आई। आप द्वारा देशभर में स्वर्णकार समाज को संगठित करने के अनुपम प्रयास किए गए। आपने अनेकों राष्ट्रीय स्वर्णकार महासम्मेलनों को संबोधितसंचालितआयोजित किया। आप द्वारा जब देखा गया कि स्वर्णकार समाज का पुरुष वर्ग नशे की गिरफ्त में है, तब आपने नशाबंदी अभियान चलाया तथा सैंकड़ों स्वर्णकार भाईयों को नशे की लत से दूर कर उन्हें भविष्य में ऐसा नहीं करने की शपथ दिलाई। इसी प्रकार जब एक जाति विशेष के लोग स्वर्णकारों के साथ शूद्र जैसा व्यवहार करते थे तब स्व वर्मा जी ने आचार्य चतुरसेन शास्त्री के साथ मिलकर उस जाति विशेष के लोगों को शास्त्रार्थ के लिए ललकारा किन्तु उनमें से कोई भी शास्त्रार्थ करने की हिम्मत नहीं कर सका। इसके उपरान्त सैकडों स्वर्णकार भाईयों को यज्ञोपवीत धारण करवाए गए। आपने निवेदन किया कि स्वर्णकार कॉलोनी में किसी मार्ग अथवा उद्यान का नाम स्व बाबूजी के नाम पर अवश्य रखा जाना चाहिए अथवा उनकी एक प्रतिमा बनाकर स्वर्णकार कॉलोनी में स्थापित की जानी चाहिए।
इसके पश्चात् कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ संजय बियानी द्वारा प्रसन्नता व्यक्त की गई कि स्वर्णकार समाज के इतनी महान् विभूति की स्मृति में विचार-गोष्ठी का आयोजन करने हेतु बियानी कॉलेज को चुना गया और इनिमित्त स्वर्णकार समाज के प्रबुद्धजन एवं मंचासीन महानुभावों का प्रवेश महाविद्यालय प्रांगण में हुआ। साथ ही उन्होंने बड़े ही रोचक अंदाज में अपना वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि जीवन में यदि किसी भी क्षेत्र में सफलता चाहिए तो एक बात ध्यान रखें। हम जो देते हैं वही लौटकर पुन: हमारे पास आता है। अत: कोई भी कार्य करने से पहले विचार करें कि इसका परिणाम क्या होगा ? साथ ही उन्होंने जीवन में 'थैंक्यू' और 'सॉरी' शब्दों का अपनाने पर विशेष बल देते हुए अनेक उदाहरणों के माध्यम से अपना प्रभावी व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम को आगे बढाते हुए अन्य मुख्य वक्ता श्री भवनीशंकर 'कुसुम' द्वारा स्व बाबूजी के के पत्रकारिता जीवन के विषय में प्रकाश डालते हुए बताया कि बाबूजी को प्रारम्भ से ही पत्र-पत्रिकाओं में लेख भेजने में रुचि थीइनके लेख विभिन्न सामाजिक पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशित होते थे। बाबूजी की मिर्जा इस्माइल (तात्कालीन प्रधानमंत्री, जयपुर रियासत) से घनिष्ठता थी। एक बार मिर्जा ने बाबूजी से एक दैनिक समाचारपत्र प्रकाशित करने का आग्रह किया और बाबूजी ने तुरन्त आग्रह स्वीकारते हुएमात्र 4-5 दिवस बाद ही 8 सितम्बर 1942 को जयपुर महाराजा के जन्मदिवस पर प्रथम समाचारपत्र प्रकाशित कर दिया और यह प्रकाशन कुछ समय तक निरन्तर चलता रहा। चूंकि बाबूजी हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान के प्रबल समर्थक थे और मिर्जा द्वारा हिन्दी भाषा तथा हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों पर आघात करने की नीति के चलते बाबूजी ने मिर्जा की गलत नीतियों के विषय में समाचार प्रकाशित करना प्रारम्भ कर दिए। परिणामस्वरूप मिर्जा द्वारा अखबार पर प्रतिबंध लगा दिया गया और साथ ही बाबूजी को 6 माह तक कैद में 'सी' श्रेणी में रखा गया। इसके पश्चात् भी जब 6 माह बाद बाबूजी बाहर आए तो उन्हें जयपुर रियासत से देश निकाला दे दिया गया और बाबूजी कभी मथुरा तो कभी दिल्ली अत्यन्त परेशानियों का सामना करते हुए जीवन व्यतीत करते रहे किन्तु मिर्जा के समक्ष झुके नहीं। एक बार जब मिर्जा ने बाबूजी को पुन: बुलाने हेतु एक दूत भेजा तो बाबूजी ने कहा, 'कि जयपुर में या तो मिर्जा ही रहेगा या फिर श्यामलाल रहेगा।' इससे उनके स्वाभिमानी व्यक्तित्व का पता चलता है। किन्तु मिर्जा की जगह वीटीक़ृष्णामाचारी प्रधानमंत्री बनकर आए और उन्होंने 25 सितम्बर 1946 को जयपुर समाचार के प्रकाशन पर लगी हुई निषेधाज्ञा वापस ली और इसके पश्चात् उनके आग्रह पर बाबूजी ने जयपुर समाचार को अपने गुरु के कहने पर राजस्थान समाचार के नाम से 28 अक्टूबर को पुन: निकालना प्रारम्भ किया। बाद में 4 जनवरी 1948 को एक समाचारपत्र 'सिंहनाद' के नाम से भी बाबूजी द्वारा प्रकाशित किया गया। समाचारपत्र प्रकाशन एवं वितरण से संबंधित समस्त कार्य बाबूजी स्वयं ही किया करते थे। आपने बताया कि बाबूजी किसी भी राजनैतिक पार्टी से प्रत्यक्ष रूप से जुडे हुए नहीं थे। किन्तु फिर भी सभी राजनैतिक दलों के बड़े-बड़े पदाधिकारी, न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी बाबूजी से मिलने घर आया करते थे और बाबूजी सभी का सम्मान करते थे।
इसके पश्चात् डॉ विष्णु पंकज जो स्व वर्मा जी के अभिनन्दन ग्रंथ के सम्पादक मण्डल के सदस्य थे। आपने बताया कि मैंने स्व वर्मा जी का साक्षात्कार लिया था। जिसमें मैंने स्व वर्मा जी से पूछा कि आपने अपने समाचारपत्र का प्रकाशन तो सत्ता के सहयोग से किया। किन्तु इसमें समाचार सदैव जनता के प्रकाशित किए, ऐसा आपने समाचारपत्र निकालने के पश्चात् तय किया अथवा प्रारम्भ से ही आपकी यही विचारधारा रही। तब स्व वर्मा जी ने मुझे बताया कि मेरी प्रारम्भ से ही सही विचारधारा थी कि मैं समाचारपत्र किसी के भी सहयोग से प्रकाशित करूं, किन्तु समाचार जनता के हित में ही प्रकाशित करूंगा। भले ही मुझे सत्ता का सहयोग मिले अथवा नहीं, चाहे मुझे कितनी भी परेशानियाें का सामना ही क्यूं ना करना पडें। डॉ पंकज द्वारा स्व वर्मा जी की स्मृति में प्रतिवर्ष पत्रकारिता पुरस्कार दिए जाने का आह्वान स्वर्णकार समाज से किया। इस पर गुरू गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में फैकल्टी ऑफ बेसिक एण्ड एप्लाईड साइंसेज संकाय के अधिष्ठाता प्रो वी क़े वर्मा द्वारा स्व वर्मा की स्मृति में प्रतिवर्ष ग्यारह हजार रुपये के पत्रकारिता पुरस्कार की घोषणा की गई।
इसके बाद विवेकानन्द जी के सार्धशती समारोह के समापन दिवस एवं स्वामी जी के जन्म दिवस पर कु सुरभि द्वारा विवेकानन्द जी के जीवन पर आधारित कुछ प्रेरक प्रसंग सुनाए गए। जिसकी सभी द्वारा सराहना की गई।
कार्यक्रम में स्व बाबूजी के जयपुर में निवासरत अधिकांश परिवारजन पधारे थे। स्व बाबूजी के पौत्र श्री हरीश वर्मा को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि द्वारा शॉल ओढाया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष द्वारा इन्हें अभिवन्दन-पत्र किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों द्वारा इन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया गया तथा मुख्य वक्ताओं द्वारा पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। इस समय सभागार में उपस्थित सभी समाजबंधु एवं परिवारजभाव विभोर हुए। साथ ही मंच संचालिका द्वारा अभिवन्दन-पत्र को पढ़कर सुनाया गया।
इसके पश्चात् कार्यक्रम के मख्ुय अतिथि डॉ महेन्द्र मधुप ने अपने उद्बोधन में बताया कि उनका परिचय स्व वर्मा से बहुत बाद में हुआ। जब वे अपना पीएचड़ी शोध कार्य पूर्ण कर रहे थे, जिसका विषय ''जयपुर की पत्र-पत्रिकाओकी स्वाधीनता आंदोलन में भूमिका'' था। इस संदर्भ में उनका स्व वर्मा जी से मिलना हुआ था। उसके बाद तो वे स्व वर्मा से बहुत प्रभावित हुए तथा इसके पश्चात् उनका स्व वर्मा जी से निरन्तर सम्पर्क बना रहा। आपने स्व वर्मा जी के विषय में बताया कि वे बहुत ही निर्भीक पत्रकार थे जिन्होंने कभी हालात से समझौता नहीं किया और न ही किसी के सामने झुके। आपने बताया कि किस प्रकार जनसम्पर्क विभाग ने त्रुटिवश स्व वर्मा द्वारा प्रकाशित किए जा रहे 'जयपुर समाचार' समाचारपत्र का सम्पादक किसी और को दर्शाया गया। जिससे स्व वर्मा जी बहुत आहत हुए और उन्होंने डॉ महेन्द्र मधुप से इस त्रुटि को संशोधित किए जाने का आग्रह किया। इस संदर्भ में डॉ महेन्द्र मधुप द्वारा शोध किया गया तथा यह निष्कर्ष निकाला गया कि पूर्व में प्रकाशित 'श्री मान सूर्योदय' समाचारपत्र के निचली पंक्ति में 'जयपुर समाचार' उधदृत था। जन सम्पर्क विभाग द्वारा समाचारपत्र का नाम ही 'जयपुर समाचार' समझे जाने पर यह भूल हुई जिसका सुधार बाद में कर दिया गया। साथ ही डॉ मधुप ने स्व वर्मा के संघर्षमयी पत्रकारिता जीवन को वर्तमान में पत्रकार बंधुओं के लिए आदर्श रूप बताते हुए उनकी विशेषताओं को अपने पत्रकारिता पेशे में ग्रहण करने की सलाह देते हुए स्व श्यामलाल वर्मा की स्मृति में सरकार द्वारा डाक टिकट जारी करवाने हेतु प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे डॉ. रविशेखर वर्मा ने भी स्व. वर्मा के संदर्भ में उनके अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि स्व. वर्मा से उनके पारिवारिक संबंध थे। स्व. वर्मा की जीवन शैली और कार्यशैली से वे बहुत प्रभावित थे।

        कार्यक्रम के अन्त में संस्था के अध्यक्ष श्री गजेन्द्र सोनी द्वारा कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों एवं समाजबंधुओं का धन्यवाद ज्ञापित किसाथ ही पूर्व में स्व वर्मा पर प्रकाशित अभिनन्दन ग्रन्थ को संस्था द्वारा समाज बंधुओं के सहयोग से पुन: स्मृति ग्रन्थ के रूप में प्रकाशित करने की घोषणा भी की गई। इस संदर्भ में उन्होंने समाजबंधुओं से सहयोग की अपेक्षा की जिस पर जोधपुर से पधारे श्रीमती विद्योत्तमा जी वर्मा एवं श्री ऋद्धिकरण जी सोनी ने इस ग्रन्थ के पुन: प्रकाशन के संदर्भ में आर्थिक सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की।  
कार्यक्रम में पधारे सभी महानुभावों को श्री सागरमल सोनी (नारनौली), शांति ज्वैलर्स, वैशाली नगर, जयपुर द्वारा महाराजा अजमीढ़ का चित्र वितरित किया गया।
कार्यक्रम में बियानी कॉलेज के पत्रकारिता विषय में अध्ययनरत् विद्यार्थी एवं समाज का प्रबुद्ध वर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहा। अन्त में राष्ट्रगान के पश्चात् पधारे हुए समाजबंधुओं ने अल्पाहार ग्रहण किया और कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।


(सागर सोनी)
मीडिया सचिव

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