Friday, January 17, 2014

Lecture in the Memory of Late Shri Shyam Lal Verma 'Dharambhushan' 
स्व श्यामलाल वर्मा 'धर्मभूषण' स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम सम्पन्

जयपुर 12 जनवरी। विवेकानंद जयन्ती के सुअवसर पर विद्याधर नगर स्थित बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के 'उत्सव' सभागार में स्वर्णकार समाज उत्थान समिति द्वारा जयपुर से प्रथम दैनिक समाचारपत्र प्रकाशित करने वाले क्रांतिकारी पत्रकार और स्वर्णकार समाज की महान् विभूिस्व श्री श्यामलाल वर्मा 'धर्मभूषण' की स्मृति में व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में शरद कृषि (हिन्दी संस्करण, पुणे) के सम्पादक एवं कृषि विपणन बोर्ड के पूर्व संयुक्त निदेशक सुविख्यात पत्रकार डॉ महेन्द्र मधुप उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मालवीय नेश्इंस्टीटयूट ऑफ टैक्नोलॉजी, जयपुर से विभागाध्यक्ष मानविकी विभाग के पद से सेवानिवृत्त प्रोफेसर रविशेखर वर्मा द्वारा की गई। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के निदेशक (अकादमिकडॉ संजय बियानी एवं प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक डॉ विष्णु पंकज रहे। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में ग्रामभारती संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्रीमान् भवानीशंकर 'कुसुम' तथा वानप्रस्थी सामाजिक कार्र्यकत्ता श्रीमानसत्यनारायण कुल्थिया रहे।
      कार्यक्रम का प्रारम्भ मंचासीन अतिथियों द्वारा महाराजा अजमीढ़ एवं स्वामी विवेकानन्द जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन एवं माल्यार्पण द्वारा किया गया। इसके पश्चात् कु क़शिश सोनी द्वारा अतिथियों का तिलक लगाकर स्वागकिया गया एवं संस्था के सदस्य श्री विनोद सोनी एवं श्री संदीप झांगी द्वारा सभी अतिथियों को स्मृति चिह्न एवं साहित्य भेंट किया गया। जोधपुर से पधारी श्रीमती विद्योत्तमा वर्मा द्वारा स्वामी विवेकानंद पर लिखित पुस्तक को साहित्य के रूप में अतिथियों को भेंट किया गया। मंचस्थ अतिथियों का परिचय कार्यक्रम संयोजक श्री उमेश कुमार सोनी द्वारा करवाया गया। इसके पश्चात् संस्था के सदस्य श्री संदीप सोनी द्वारा संस्था के उद्देश्यों तथसंस्था द्वारा अब तक सम्पन्न किए गए कार्यक्रमाें के संदर्भ में प्रजेन्टेशन प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम की रूपरेखा को संस्था की सदस्या श्रीमती सुरभि सोनी द्वारा अवगत कराया गया। इसके पश्चात् मुख्य वक्ता श्री सत्यनारायण कुल्थिया द्वारा स्व श्री श्यामलाल वर्मा 'धर्मभूषण' के पारिवारिक एवं सामाजिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि स्व वर्मा जी का जन्म ज्येष्ठ कृष्णा 30 सोमवार संवत् 1954, 1 जून 1897 को अजीमगंज जिला मुर्शीदाबाद (बंगाल) में स्व श्री मोतीलाल जी के घर पर हुआ। प्रारम्भ से ही इनकी लेखन, धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में रुचि रही। इनका विवाह श्रीमती उमा देवी के साथ सम्पन्न हुआ। इनके दो पुत्र तथा तीन पुत्रियाँ थी। इनके ज्येष्ठ पुत्र का स्वर्गवास हो चुका है तथा ज्येष्ठ पुत्र का परिवार एवं कनिष्ठ पुत्र परिवार सहित जयपुर में निवास कर रहे हैं। आप 1932 में महाराजा भवानीसिंह के जन्म के वर्षभर के समारोहों को देखने जयपुर आए और यहीं बस गए।
आपने बताया कि 12 वर्ष की अल्पायु में ही पंडित सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में चल रहे राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पडे। 16 वर्ष की आयु में परिवारजन के साथ मथुरा आकर कुन्दन जडाई का पैतृक कार्य सीखने लगे। स्व वर्मा जी हिन्दू महासभा के सक्रिय सदस्य थे। इन्हाेंने महासभा की ओर से चुनाव भी लडा था। स्व वर्मा जी हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान के कट्टर समर्थक थे। 1962 में तात्कालीन केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए स्र्[1]ा नियंत्रण अधिनियम से सम्पूर्ण देश का स्वर्णकारी कार्य करने वाला वर्ग बहुत ज्यादा प्रभावित हुआ था। इन विकट क्षणों में स्व वर्मा जी द्वारा अथक प्रयास किए गए और समाज को राहत दिलवाई। स्व वर्मा जी द्वारा जयपुर में मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार सभा की स्थापना की गई थी और आप ही के प्रयासों से जयपुर में स्थित स्वर्णकार कॉलोनी अपने अस्तित्व में आई। आप द्वारा देशभर में स्वर्णकार समाज को संगठित करने के अनुपम प्रयास किए गए। आपने अनेकों राष्ट्रीय स्वर्णकार महासम्मेलनों को संबोधितसंचालितआयोजित किया। आप द्वारा जब देखा गया कि स्वर्णकार समाज का पुरुष वर्ग नशे की गिरफ्त में है, तब आपने नशाबंदी अभियान चलाया तथा सैंकड़ों स्वर्णकार भाईयों को नशे की लत से दूर कर उन्हें भविष्य में ऐसा नहीं करने की शपथ दिलाई। इसी प्रकार जब एक जाति विशेष के लोग स्वर्णकारों के साथ शूद्र जैसा व्यवहार करते थे तब स्व वर्मा जी ने आचार्य चतुरसेन शास्त्री के साथ मिलकर उस जाति विशेष के लोगों को शास्त्रार्थ के लिए ललकारा किन्तु उनमें से कोई भी शास्त्रार्थ करने की हिम्मत नहीं कर सका। इसके उपरान्त सैकडों स्वर्णकार भाईयों को यज्ञोपवीत धारण करवाए गए। आपने निवेदन किया कि स्वर्णकार कॉलोनी में किसी मार्ग अथवा उद्यान का नाम स्व बाबूजी के नाम पर अवश्य रखा जाना चाहिए अथवा उनकी एक प्रतिमा बनाकर स्वर्णकार कॉलोनी में स्थापित की जानी चाहिए।
इसके पश्चात् कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ संजय बियानी द्वारा प्रसन्नता व्यक्त की गई कि स्वर्णकार समाज के इतनी महान् विभूति की स्मृति में विचार-गोष्ठी का आयोजन करने हेतु बियानी कॉलेज को चुना गया और इनिमित्त स्वर्णकार समाज के प्रबुद्धजन एवं मंचासीन महानुभावों का प्रवेश महाविद्यालय प्रांगण में हुआ। साथ ही उन्होंने बड़े ही रोचक अंदाज में अपना वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि जीवन में यदि किसी भी क्षेत्र में सफलता चाहिए तो एक बात ध्यान रखें। हम जो देते हैं वही लौटकर पुन: हमारे पास आता है। अत: कोई भी कार्य करने से पहले विचार करें कि इसका परिणाम क्या होगा ? साथ ही उन्होंने जीवन में 'थैंक्यू' और 'सॉरी' शब्दों का अपनाने पर विशेष बल देते हुए अनेक उदाहरणों के माध्यम से अपना प्रभावी व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम को आगे बढाते हुए अन्य मुख्य वक्ता श्री भवनीशंकर 'कुसुम' द्वारा स्व बाबूजी के के पत्रकारिता जीवन के विषय में प्रकाश डालते हुए बताया कि बाबूजी को प्रारम्भ से ही पत्र-पत्रिकाओं में लेख भेजने में रुचि थीइनके लेख विभिन्न सामाजिक पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशित होते थे। बाबूजी की मिर्जा इस्माइल (तात्कालीन प्रधानमंत्री, जयपुर रियासत) से घनिष्ठता थी। एक बार मिर्जा ने बाबूजी से एक दैनिक समाचारपत्र प्रकाशित करने का आग्रह किया और बाबूजी ने तुरन्त आग्रह स्वीकारते हुएमात्र 4-5 दिवस बाद ही 8 सितम्बर 1942 को जयपुर महाराजा के जन्मदिवस पर प्रथम समाचारपत्र प्रकाशित कर दिया और यह प्रकाशन कुछ समय तक निरन्तर चलता रहा। चूंकि बाबूजी हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान के प्रबल समर्थक थे और मिर्जा द्वारा हिन्दी भाषा तथा हिन्दुओं के धार्मिक स्थलों पर आघात करने की नीति के चलते बाबूजी ने मिर्जा की गलत नीतियों के विषय में समाचार प्रकाशित करना प्रारम्भ कर दिए। परिणामस्वरूप मिर्जा द्वारा अखबार पर प्रतिबंध लगा दिया गया और साथ ही बाबूजी को 6 माह तक कैद में 'सी' श्रेणी में रखा गया। इसके पश्चात् भी जब 6 माह बाद बाबूजी बाहर आए तो उन्हें जयपुर रियासत से देश निकाला दे दिया गया और बाबूजी कभी मथुरा तो कभी दिल्ली अत्यन्त परेशानियों का सामना करते हुए जीवन व्यतीत करते रहे किन्तु मिर्जा के समक्ष झुके नहीं। एक बार जब मिर्जा ने बाबूजी को पुन: बुलाने हेतु एक दूत भेजा तो बाबूजी ने कहा, 'कि जयपुर में या तो मिर्जा ही रहेगा या फिर श्यामलाल रहेगा।' इससे उनके स्वाभिमानी व्यक्तित्व का पता चलता है। किन्तु मिर्जा की जगह वीटीक़ृष्णामाचारी प्रधानमंत्री बनकर आए और उन्होंने 25 सितम्बर 1946 को जयपुर समाचार के प्रकाशन पर लगी हुई निषेधाज्ञा वापस ली और इसके पश्चात् उनके आग्रह पर बाबूजी ने जयपुर समाचार को अपने गुरु के कहने पर राजस्थान समाचार के नाम से 28 अक्टूबर को पुन: निकालना प्रारम्भ किया। बाद में 4 जनवरी 1948 को एक समाचारपत्र 'सिंहनाद' के नाम से भी बाबूजी द्वारा प्रकाशित किया गया। समाचारपत्र प्रकाशन एवं वितरण से संबंधित समस्त कार्य बाबूजी स्वयं ही किया करते थे। आपने बताया कि बाबूजी किसी भी राजनैतिक पार्टी से प्रत्यक्ष रूप से जुडे हुए नहीं थे। किन्तु फिर भी सभी राजनैतिक दलों के बड़े-बड़े पदाधिकारी, न्यायाधीश, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी बाबूजी से मिलने घर आया करते थे और बाबूजी सभी का सम्मान करते थे।
इसके पश्चात् डॉ विष्णु पंकज जो स्व वर्मा जी के अभिनन्दन ग्रंथ के सम्पादक मण्डल के सदस्य थे। आपने बताया कि मैंने स्व वर्मा जी का साक्षात्कार लिया था। जिसमें मैंने स्व वर्मा जी से पूछा कि आपने अपने समाचारपत्र का प्रकाशन तो सत्ता के सहयोग से किया। किन्तु इसमें समाचार सदैव जनता के प्रकाशित किए, ऐसा आपने समाचारपत्र निकालने के पश्चात् तय किया अथवा प्रारम्भ से ही आपकी यही विचारधारा रही। तब स्व वर्मा जी ने मुझे बताया कि मेरी प्रारम्भ से ही सही विचारधारा थी कि मैं समाचारपत्र किसी के भी सहयोग से प्रकाशित करूं, किन्तु समाचार जनता के हित में ही प्रकाशित करूंगा। भले ही मुझे सत्ता का सहयोग मिले अथवा नहीं, चाहे मुझे कितनी भी परेशानियाें का सामना ही क्यूं ना करना पडें। डॉ पंकज द्वारा स्व वर्मा जी की स्मृति में प्रतिवर्ष पत्रकारिता पुरस्कार दिए जाने का आह्वान स्वर्णकार समाज से किया। इस पर गुरू गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में फैकल्टी ऑफ बेसिक एण्ड एप्लाईड साइंसेज संकाय के अधिष्ठाता प्रो वी क़े वर्मा द्वारा स्व वर्मा की स्मृति में प्रतिवर्ष ग्यारह हजार रुपये के पत्रकारिता पुरस्कार की घोषणा की गई।
इसके बाद विवेकानन्द जी के सार्धशती समारोह के समापन दिवस एवं स्वामी जी के जन्म दिवस पर कु सुरभि द्वारा विवेकानन्द जी के जीवन पर आधारित कुछ प्रेरक प्रसंग सुनाए गए। जिसकी सभी द्वारा सराहना की गई।
कार्यक्रम में स्व बाबूजी के जयपुर में निवासरत अधिकांश परिवारजन पधारे थे। स्व बाबूजी के पौत्र श्री हरीश वर्मा को कार्यक्रम के मुख्य अतिथि द्वारा शॉल ओढाया गया। कार्यक्रम के अध्यक्ष द्वारा इन्हें अभिवन्दन-पत्र किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों द्वारा इन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया गया तथा मुख्य वक्ताओं द्वारा पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। इस समय सभागार में उपस्थित सभी समाजबंधु एवं परिवारजभाव विभोर हुए। साथ ही मंच संचालिका द्वारा अभिवन्दन-पत्र को पढ़कर सुनाया गया।
इसके पश्चात् कार्यक्रम के मख्ुय अतिथि डॉ महेन्द्र मधुप ने अपने उद्बोधन में बताया कि उनका परिचय स्व वर्मा से बहुत बाद में हुआ। जब वे अपना पीएचड़ी शोध कार्य पूर्ण कर रहे थे, जिसका विषय ''जयपुर की पत्र-पत्रिकाओकी स्वाधीनता आंदोलन में भूमिका'' था। इस संदर्भ में उनका स्व वर्मा जी से मिलना हुआ था। उसके बाद तो वे स्व वर्मा से बहुत प्रभावित हुए तथा इसके पश्चात् उनका स्व वर्मा जी से निरन्तर सम्पर्क बना रहा। आपने स्व वर्मा जी के विषय में बताया कि वे बहुत ही निर्भीक पत्रकार थे जिन्होंने कभी हालात से समझौता नहीं किया और न ही किसी के सामने झुके। आपने बताया कि किस प्रकार जनसम्पर्क विभाग ने त्रुटिवश स्व वर्मा द्वारा प्रकाशित किए जा रहे 'जयपुर समाचार' समाचारपत्र का सम्पादक किसी और को दर्शाया गया। जिससे स्व वर्मा जी बहुत आहत हुए और उन्होंने डॉ महेन्द्र मधुप से इस त्रुटि को संशोधित किए जाने का आग्रह किया। इस संदर्भ में डॉ महेन्द्र मधुप द्वारा शोध किया गया तथा यह निष्कर्ष निकाला गया कि पूर्व में प्रकाशित 'श्री मान सूर्योदय' समाचारपत्र के निचली पंक्ति में 'जयपुर समाचार' उधदृत था। जन सम्पर्क विभाग द्वारा समाचारपत्र का नाम ही 'जयपुर समाचार' समझे जाने पर यह भूल हुई जिसका सुधार बाद में कर दिया गया। साथ ही डॉ मधुप ने स्व वर्मा के संघर्षमयी पत्रकारिता जीवन को वर्तमान में पत्रकार बंधुओं के लिए आदर्श रूप बताते हुए उनकी विशेषताओं को अपने पत्रकारिता पेशे में ग्रहण करने की सलाह देते हुए स्व श्यामलाल वर्मा की स्मृति में सरकार द्वारा डाक टिकट जारी करवाने हेतु प्रयास करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अध्यक्षता कर रहे डॉ. रविशेखर वर्मा ने भी स्व. वर्मा के संदर्भ में उनके अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि स्व. वर्मा से उनके पारिवारिक संबंध थे। स्व. वर्मा की जीवन शैली और कार्यशैली से वे बहुत प्रभावित थे।

        कार्यक्रम के अन्त में संस्था के अध्यक्ष श्री गजेन्द्र सोनी द्वारा कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों एवं समाजबंधुओं का धन्यवाद ज्ञापित किसाथ ही पूर्व में स्व वर्मा पर प्रकाशित अभिनन्दन ग्रन्थ को संस्था द्वारा समाज बंधुओं के सहयोग से पुन: स्मृति ग्रन्थ के रूप में प्रकाशित करने की घोषणा भी की गई। इस संदर्भ में उन्होंने समाजबंधुओं से सहयोग की अपेक्षा की जिस पर जोधपुर से पधारे श्रीमती विद्योत्तमा जी वर्मा एवं श्री ऋद्धिकरण जी सोनी ने इस ग्रन्थ के पुन: प्रकाशन के संदर्भ में आर्थिक सहयोग करने की इच्छा व्यक्त की।  
कार्यक्रम में पधारे सभी महानुभावों को श्री सागरमल सोनी (नारनौली), शांति ज्वैलर्स, वैशाली नगर, जयपुर द्वारा महाराजा अजमीढ़ का चित्र वितरित किया गया।
कार्यक्रम में बियानी कॉलेज के पत्रकारिता विषय में अध्ययनरत् विद्यार्थी एवं समाज का प्रबुद्ध वर्ग बड़ी संख्या में उपस्थित रहा। अन्त में राष्ट्रगान के पश्चात् पधारे हुए समाजबंधुओं ने अल्पाहार ग्रहण किया और कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।


(सागर सोनी)
मीडिया सचिव

09928062460

Wednesday, July 3, 2013

Swarnkar Samaj Hounouring of Student and Scholarship Distribution Programme


स्वर्णकार समाज द्वारा आयोजित प्रतिभा सम्मान एवं छात्रवृत्ति वितरण समारोह भव्यता के साथ हुआ सम्पन्न
     जयपुर, 30 जून। सत्र 2012-13 में राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर द्वारा आयोजित 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में राज्य एवं जिला स्तर पर स्वर्णकार समाज के मेरिट में आने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों एवं साथ ही आवश्यकता आधारित विद्यार्थियों को छात्रवृत्तिा प्रदान करने तथा उच्चतर शिक्षा में अध्ययनरत् विद्यार्थियों को सम्मानित करने हेतु राजस्थान पुलिस अकादमी, नेहरू नगर, पानीपेच, जयपुर के सभागार में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, अजमेर के अध्यक्ष प्रोफेसर पी.एस.वर्मा ने कहा कि किसी भी समाज अथवा देश के विकास का सर्वाधिक सशक्त माध्यम शिक्षा ही है। शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर ही हम अपने समाज व देश को आगे बढ़ा सकते हैं। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री हितेशचन्द्र स्वर्णकार, राज्य स्तरीय पुरस्कृत शिक्षक, बांसवाडा, ने कहा कि बालक के सर्वांगीण विकास का तात्पर्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं है। इसके अतिरिक्त उसमें शैक्षिक एवं सामाजिक मूल्यां का विकास करना भी आवश्यक है। आज का विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त कर नौकरी की दौड़ में शामिल है किन्तु वह अपने सामाजिक और मानवीय मूल्यों को पीछे छोड़ रहा है। इसका प्रथम दायित्व एक शिक्षक का है। साथ ही परिवार से भी अपेक्षा की जाती है कि वह अपने बच्चों में सर्व प्रकार के सकारात्मक मूल्यों का विकास करे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वित्ता विभाग, राजस्थान सरकार में संयुक्त सचिव श्रीमान् एल.एन.सोनी (आईएएस) ने की। इन्होंने अपने ओजस्वी उद्बोधन में शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने पर बल दिया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्रीमान् चन्द्रप्रकाश अग्रोया ने कहा कि स्वर्णकार समाज में राज्य, राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। किन्तु फिर भी स्वर्णकार समाज को शैक्षिक दृष्टि से विकसित करने हेतु अभी और अधिक प्रयास करने होंगे। इस दिशा में सार्थक उपलब्धि प्राप्त कर ही हम अपने समाज को आगे ला सकते हैं। कार्यक्रम के अन्य विशिष्ट अतिथि श्रीमान् जुगलकिशोर मौसूण ने समाज के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा में आगे आकर अपने परिवार एवं समाज के विकास में योगदान हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम संयोजक उमेश कुमार सोनी ने बताया कि कार्यक्रम में 08 मेरिट स्कॉलर्स (हर्षा सोनी-जयपुर, हेमन्त सोनी-सीकर, अंकित सोनी-सीकर, आशीष सोनी-भरतपुर, विनोद कुमार सोनी-झालवाड, सुप्रिया सोनी-हनुमानगढ़, आदित्य सोनी-अलवर, मीनाक्षी सोनी-सीकर) को प्रति विद्यार्थी 5100/- छात्रवृत्तिा के रूप में प्रदान किए तथा 18 आवश्यकता आधारित प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उनके गत कक्षा के प्राप्तांकों के आधार पर 5100/-, 6100/-, 7100/- रुपये प्रति छात्र छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान किए गए। साथ ही उच्चतर शिक्षा में अध्ययनरत् 21 विद्यार्थियों (कु. भावना सोनी-नागौर, रेवन्त सोनी-अजमेर, चैतन्य सोनी-जयपुर, कु. मोनिका सिंह सोनी-जयपुर, कु. सुरभि सोनी-जयपुर, कु. वर्षा सोनी-जयपुर, कु. कसुम सोनी-जयपुर, तनय सोनी-जयपुर, लोकेश कुमार सोनी-अजमेर, अक्षय सर्राफ-जयपुर, शुभम स्वर्णकार-बांसवाडा, कु. शिखा सोनी-जयपुर, कु. भावना सोनी-जयपुर, अभिषेक सोनी-जयपुर, सौरभ स्वर्णकार-बांसवाडा, अंकित सोनी-अलवर, अभय सर्राफ-जयपुर, कु. गुंजन सोनी-जयपुर, प्रशान्त सोनी-जयपुर, मोहित सोनी-जयपुर, हिमांशु सोनी-जयपुर) को तथा कार्यक्रम में सहयोग देने वाले 28 भामाशाहों (श्री जुगलकिशोर मौसूण-जयपुर, श्री सत्यनारायण मौसूण-जयपुर, श्री भंवरलाल सोनी (भामा)-जयपुर, श्री सागरमल सोनी (नारनौली)-जयपुर, श्री विजय सोनी (जालू)-जयपुर, श्री सतीश कुमार सोनी (जोड़ा)-जयपुर, श्री दीपक कुमार सोनी (जाल्वी)-जयपुर, श्री प्रहलाद सोनी-जयपुर, श्री रविन्द्र सोनी (रोड़ा)-जयपुर, श्री मनोज सोनी (मौसूण)-जयपुर, श्रीमती विद्योत्तामा वर्मा (देवाल)-जोधपुर, श्री अम्बालाल स्वर्णकार-अजमेर, श्री सीताराम भामा-जयपुर, डॉ. आर.पी.आसट-जयपुर, श्री नाथूलाल सोनी (तोषावड़)-सीकर, श्री नंदकुमार कैलाशचंद सोनी (सारडीवाल)-जयपुर, श्री रमाकान्त जौहरी (कडेल)-जयपुर, श्री रामस्वरूप वर्मा (माण्डण)-जयपुर, श्री बजरंग लाल सोनी-जयपुर, श्री सत्यनारायण सोनी (सुनालिया)-जयपुर, श्री मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार छात्र-छात्राएँ वेलफेयर सोसायटी-जोधपुर, श्री सूरज सोनी (रूण्डवाल)-जयपुर, श्री ओम सोनी (बूटण), श्री अनिल सोनी (दौसोल्या), श्री हितेशचन्द्र स्वर्णकार (बेवार)-बांसवाड़ा, श्री सुनील सोनी (सहदेवड़ा)-जयपुर, श्री लखन सोनी (अग्रोया)-जोधपुर, श्री निखिल सोनी (थूणगर)-जयपुर) को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में स्वर्णकार समाज का प्रबुध्द वर्ग, विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, समाज सेवी, व्यवसायी वर्ग, बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग काफी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम के अन्त में संस्था के सचिव योगेश सोनी ने अतिथियों तथा समाज बंधुओं का धन्यवाद ज्ञापन किया। मंच संचालन श्रीमती इंदुलता सोनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सफल संचालन में संस्था के सभी सदस्यों का अभूतपूर्व सहयोग रहा।


(सागर सोनी)

प्रचार मंत्री

Tuesday, April 30, 2013

स्वर्णकार समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिये स्वर्णकार समाज उत्थान समिति (रजि.) द्वारा छात्रवृत्ति योजना (द्वितीय वर्ष) (Scholarship Plan for the Students of Swarnkar Samaj)


स्वर्णकार समाज उत्थान समिति (रजि.) द्वारा वर्ष 2013 में माध्यमिक (कक्षा 8 से 10 तक) तथा उच्च माध्यमिक स्तर (कक्षा 1112) पर अध्ययनरत् विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियाँ प्रदान करने की जायेंगी। जिसके अन्तर्गत निम्नानुसार छात्रवृत्तियाँ प्रदान की जायेंगी-
1. मेरिट स्कॉलरशिप - राजस्थान में बोर्ड ऑफ सैकण्डरी एजुकेशन राजस्थान, अजमेर द्वारा आयोजित माध्यमिक अथवा उच्च माध्यमिक स्तरीय वार्षिक परीक्षा में राज्य अथवा जिला स्तर पर प्रथम 15 मेरिट क्रमांक तक आने वाले विद्यार्थियों को 5100/- प्रति विद्यार्थी (सत्र 2013-14 हेतु अधिकतम 07 विद्यार्थी) की राशि छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान की जायेगी।
2. आवश्यकता आधारित प्रतिभाशाली विद्यार्थियों हेतु छात्रवृत्ति (विद्यालय स्तर पर अध्ययन हेतु कक्षा 08 से 12 तक) - इसके अन्तर्गत ऐसे विद्यार्थी जो धनाभाव के कारण शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ हैं अथवा कठिनाई अनुभव कर रहे हैं, को छात्रवृत्ति प्रदान की जायेगी। (सत्र 2013-14 हेतु अधिकतम 14 विद्यार्थी) इस श्रेणी के अन्तर्गत तीन उपश्रेणियां बनाई गई हैं:-
2.1     आवश्यकता आधारित उच्च प्रतिभाशाली विद्यार्थी - इस श्रेणी में उन विद्यार्थियों को लाभ प्रदान किया जा सकेगा। जिनके प्राप्तांक पिछली कक्षा में 75 प्रतिशत या इससे अधिक हैं। इस हेतु प्रति छात्र 7100/- रुपये अथवा विद्यालय की कुल वार्षिक फीस की राशि दोनों में से जो न्यून हो छात्रवृत्ति के रूप में एक वर्ष हेतु प्रदान की जायेगी। (सत्र 2013-14 हेतु अधिकतम 06 विद्यार्थी)
2.2     आवश्यकता आधारित औसत प्रतिभाशाली विद्यार्थी - इस श्रेणी में उन विद्यार्थियों को लाभ प्रदान किया जा सकेगा। जिनके प्राप्तांक पिछली कक्षा में 60 प्रतिशत या इससे अधिक तथा 75 प्रतिशत से कम हैं। इस हेतु प्रति छात्र 6100/- रुपये अथवा विद्यालय की कुल वार्षिक फीस की राशि दोनों में से जो न्यून हो छात्रवृत्ति के रूप में एक वर्ष हेतु प्रदान की जायेगी। (सत्र 2013-14 हेतु अधिकतम 04 विद्यार्थी)
2.3     आवश्यकता आधारित अल्प प्रतिभाशाली विद्यार्थी - इस श्रेणी में उन विद्यार्थियों को लाभ प्रदान किया जा सकेगा। जिनके प्राप्तांक पिछली कक्षा (उत्तीर्ण) में प्राप्तांकों का प्रतिशत 60 प्रतिशत से न्यून है। इस हेतु प्रति छात्र 5100/- रुपये अथवा विद्यालय की कुल वार्षिक फीस की राशि दोनों में से जो न्यून हो छात्रवृत्ति के रूप में एक वर्ष हेतु प्रदान की जायेगी। (सत्र 2013-14 हेतु अधिकतम 04 विद्यार्थी)
- उक्त सभी छात्रवृत्तियां संस्था द्वारा जून अंतिम सप्ताह अथवा जुलाई प्रथम सप्ताह में आयोजित कार्यक्रम के अन्तर्गत ही चिह्नित विद्यार्थियों को प्रदान की जायेगी।
कार्यक्रम के अन्तर्गत उच्च शिक्षा (इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रबंधन अथवा अन्य प्रोफेशनल कोर्सेंज) में अध्ययनरत् विद्यार्थियों को भी प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया जायेगा।
उक्त सभी प्रकार के विद्यार्थियों की सूचना कृपया निम्न सम्पर्क सूत्रों पर प्रेषित करने की कृपा करें।
छात्रवृत्ति प्रदान करने हेतु समाज के भामाशाहों से सहयोग अपेक्षित है।
विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने संबंधी नियम एवं अधिक जानकारी हेतु संस्था की बेवसाइट से सूचना डाउनलोड की जा सकती है अथवा निम्न पदाधिकारियों से सम्पर्क कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है:-
सम्पर्क व्यक्ति : गजेन्द्र सोनी-अध्यक्ष (9414074401), योगेश सोनी-सचिव (9314023251), उमेश कुमार सोनी-संयोजक (9314405401)

कार्यालय पता : ए-1, गोविन्द देव कॉलोनी, चौगान स्टेडियम के पीछे, तालकटोरा, जयपुर-302002
बेवसाइट % www.swarnkarutthan.com, ब्लॉग % http://swarnkarutthan.blogspot.com
ई-मेल % ssus.rajasthan@gmail.com

Tuesday, January 29, 2013

Lecture on "Aacharya Chatursen Shaastri"



आचार्य चतुरसेन शास्त्री स्मृति व्याख्यान आयोजित
जयपुर 27 जनवरी। विद्याधर नगर स्थित बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के उत्सव सभागार में स्वर्णकार समाज उत्थान समिति और बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के संयुक्त तत्वाधान में रविवार को आचार्य चतुरसेन शास्त्री स्मृति व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया    कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखक, चिकित्सक, वास्तु शास्त्री और साहित्यका आचार्य चतुरसेन शास्त्री के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में चर्चा की गई। ''करे कोई तरकीब ऐसी कि सब संभलते रहें, हवाएं भी चलती रहें और दिए भी जलते रहे'', कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी के निदेक डॉ रामधारी सैनी ने कुछ इन्ही पंक्तियों के साथ अपनी बात के शुरूआत करते हुए कहा कि आचार्य चतुरसेन शास्त्री का लेखन के क्षेत्र में योगदान अतुलनीय है, उन्होंने कहा कि एक अच्छे लेखक की रचनाएं किसी सम्मान और पुरस्कार की मोहताज नहीं होती, पाठकों के बीच उनकी प्रसिद्धि और इतिहास के पन्नों में उनका नाम ही उन्हें महान् और अमर बना देता है। जिस तरह से कबीर और मीरा को आज तक किसी पुरस्कार या सम्मान से नहीं नवाजा गया, लेकिन फिर भी उनकी रचनाएं लोगों की जुबान पर अमिट रूप से अंकित हो गई हैं, ठीक उसी तरह आचार्य चतुरसेन शास्त्री भी लोगों के दिलों में जगह बना कर अमर हो गए हैं।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता गुरु गोविन्द सिंह इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में फैकल्टी ऑफ बेसिक एण्ड एप्लाइड सांइसेस, के डीन प्रो वी क़े वर्मा ने आचार्य चतुरसेन शास्त्री के पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इनका जन्म 26 अगस्त, 1891 को बिबियाना, चान्दोल ग्राम के पास, बुलन्द शहर, उत्तरप्रदेश में हुआ था। इनके जन्म का नाम चतुर्भुज था। इनके दादा मनसुख बाबा तथा पिता केवलराम जी थे। गाँव में इनकी सर्राफे की दुकान थी। 1901 में आर्य समाज के पण्डितों द्वारा इनका यज्ञोपवीत संस्कार करवाया गया। 1907 से 1911 तक इनका जयपुर प्रवास रहा। 1915 में जयपुर के संस्कृत महाविद्यालय से इन्होंने संस्कृत शास्त्री एवं आयुर्वेद की परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं। बचपन से ही समाज सेवा की भावना के चलते इन्होंने अपने मित्रों के साथ मिलकर एक प्रीति मण्डल बनाया। जिसकी शुरूआत इन्होंने इन शब्दों के साथ की :-
आइये मिल बैठकर, एक सभा कायम कीजिए।
नाम उसका प्रीतिमण्डल, बस अभी रख दीजिए।
यह उन्नति सोपान, जो दुघर्ष है भारी यहाँ।
हम सबों को जोश में, हस्तामलक सा दीखता।
आचार्य जी प्रख्यात आयुर्वेदाचार्य भी थे। अजमेर में इनके श्वसुर का ''कल्याण औषधालय'' के नाम से औषधालय चलता था जिसमें कुछ समय आचार्य जी ने कार्य भी किया। 1919 में भाई भद्रसेन व पत्नी के साथ वीटी स्टेशन पहुंचे व कालवादेवी रोड़ पर ''अजमेर वाले वैद्यराज'' के नाम से औषधालय शुरू किया। इनके द्वारा लिखित ग्रन्थ ''सत्याग्रह और असहयोग'' को गणेश शंकर विद्यार्थी ने ''राजनीति की गीता'' कहा। इनके द्वारा लिखे गए प्रमुख ग्रन्थों में वैशाली की नगर वधु, वयम् रक्षामं:, गोली, धर्मपुत्र, सोना और खून, सोमनाथ, निरोग जीवन, यादों की परछाईयां आदि हैं। आचार्य जी द्वारा अपनी आत्मकथा ''मेरी जीवन कहानी'' भी लिखी गई है। प्रो वी क़े वर्मा ने बड़े दु:ख के साथ कहा कि आचार्य चतुरसेन जी का योगदान साहित्य और आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में अतुलनीय है, किन्तु इन्हें आज के दौर में अहंकारी लेखक कहकर नकारा जाता है, लेकिन वास्तव में वह अहंकारी नहीं बल्कि स्वाभिमानी लेखक थे।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बियानी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के चेयरमैन डॉ राजीव बियानी ने कहा कि आचार्य चतुरसेन शास्त्री का सम्पूर्ण जीवन एक चिन्तन और मनन का विषय है, लोगों के लिए आर्द है। उन्होंने कहा कि आचार्य चतुरसेन शास्त्री के व्यक्तित्व की सबसे बडी विशेषता यह कि उनमें देने की इच्छा थी, लेने की ललक नहीं थी। उनका यही व्यक्तित्व हम सभी के मनो में आज भी हम जीवित है, बस जरूरत है, उसे पहचान कर निखारने की।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश से विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ चन्द्रशेखर शास्त्री ने भी अपने विचार व्यक्त किए। आपने अपने उद्गार में आचार्य चतुरसेन शास्त्री के जीवन से संबंधित कुछ अनछुए पहलुओं पर चर्चा की। आपने बताया कि आचार्य चतुरसेन जी के परिवार से आपका अभी भी निरन्तर सम्पर्क है और आपने आचार्य जी के दिल्ली स्थित निवास की सुन्दरता एवं वैभव का बखान करते हुए बताया कि आचार्य जी एक बहुत अच्छे शिल्पी भी थे। इन्होंने अपने हाथों से अपने निवास को सजाया है और इसकी सुन्दरता देखते ही बनती है। आपने बहुत ही गंभीर स्वर में कहा कि यदि आचार्य जी के द्वारा लिखित साहित्य को नहीं सहेजा गया तो इतिहास के लिए एक बहुत बडी हानि होगी। ये स्वर्णकार समाज का दायित्व है कि वे आचार्य जी के वर्तमान में उपलब्ध साहित्य के संरक्षण के लिये पहल करे। आपने बताया कि आचार्य जी का वर्तमान में जो साहित्य उपलब्ध है, उसे लगभग 24 पुस्तकों में श्रृंखलाबद्ध तरीके से सुरक्षित किया जा सकता है जिसपर औसतन 22 से 24 लाख रुपये का खर्च होने का अनुमान है। यदि समाज के भामाशाह आगे आयें तो आचार्य जी की दुर्लभ कृतियों को भविष्य हेतु सुरक्षित किया जा सकता है। आपने इस बात पर भी बल दिया कि देश का स्वर्णकार समाज प्रयास करे और आचार्य चतुरसेन शास्त्री को 'भारत रत्न' से अलंकृत किए जाने हेतु सरकार को लिखे।
कार्यक्रम का सर्वाधिक सुखद पहलु ये रहा है कि डॉ चन्द्रशेखर शास्त्री के आग्रह पर आचार्य चतुरसेन शास्त्री की दोहिती कु क़ानन चतुरसेन भी कार्यक्रम में उपस्थित हुई
          इस अवसर पर राजस्थान विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डा सुधीर सोनी ने कहा कि संघर्ष ही इंसान के व्यक्तित्व को निखारता है, जिस प्रकार सोने को तपाकर उसे और अधिक मूल्यवान और सुन्दर बनाया जाता हैं, उसी प्रकार संघर्षो का सामना करते करते इंसान एक सफल व्यक्तित्व के रूप में सामने आता है। मुश्किलें जितनी अधिक होती है, जीत का मजा उतना ही अधिक आता है, आचार्य शास्त्री के जीवन में भी संघर्ष बहुत थे, और उन सभी का सामना कर वह सफल व्यक्तित्व के रूप में पूरी दुनिया के सामने आए। डॉ सोनी ने आचार्य जी के द्वारा लिखित प्रमुख ग्रन्थों एवं उपन्यासों पर साहित्यिक रूप से प्रकाश डाला तथा उनके साहित्यिक वैभव से समाज बंधुओं का परिचय करवाया।
इसी के साथ कार्यक्रम के अध्यक्ष बृज भाषा अकादमी के पूर्व सचिव श्रीमान नाथूलाल महावर ने कार्यक्रम को अपनी आशु कविता के माध्यम से सार के रूप में प्रस्तुत किया और वातावरण को आनन्दमय बना दिया।
कार्यक्रम का प्रारम्भ सभी अतिथि महानुभावों द्वारा माँ सरस्वती, भगवान श्री गणेश और महाराजा अजमीढ़ के समक्ष द्वीप प्रज्जवलित कर किया गया। इसके पश्चात् अतिथियों का तिलक द्वारा स्वागत संस्था के सदस्य विमलेश सोनकी सुपुत्री कु क़शिश सोनी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों का परिचय संस्था के संयुक्त सचिव एवं कार्यक्रम संयोजक उमेश कुमार सोनी द्वारा करवाया गया। इसी क्रम में संस्था का परिचय सदस्य संदीप सोनी तथा इसके उद्देश्य पर कैलाशचंद सारडीवाल द्वारा प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के अंत में स्वर्णकार समाज उत्थान समिति के अध्यक्ष गजेन्द्र सोनी ने आए हुए समस्त अतिथियों और स्वर्णकार समाज उत्थान समिति की टीम की ओर से किए गए सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके पश्चात् अतिथियों को स्मृति चिह्न के रूप में साहित्य भेंट किया गया जिसके अन्तर्गत मुख्य अतिथि डॉ रामधारी सैनी को साहित्य गौ सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्रीमान् गुलजारी लाल सोनी द्वारा, अध्यक्ष श्रीमान् नाथूलाल महावर को श्रीमान् चन्द्रप्रकाश अग्रोया द्वारा, विशिष्ट अतिथि डॉ राजवी बियानी को सैल्स टैक्स में अतिरिक्त आयुक्त एवं हाल ही में आईएएस अधिकारी के रूप में पदोन्नत श्रीमान् एलएनसोनी द्वारा, मुख्य वक्ता प्रो वीक़ेवर्मा को ज्वैलरी व्यवसायी एवं कोलोनाईजर श्री महेश सोनी द्वारा, अन्य मुख्य वक्ता डॉ सुधीर सोनी को मैढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज जयपुर पश्चिम के महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्षा श्रीमती मिथिलेश सुनालिया द्वारा तथा विशेष आमंत्रित अतिथि डॉ चन्द्रशेखर शास्त्री को पूर्व संयुक्त रजिस्ट्रार सहकारिता विभाग श्रीमान् रामजीलाल सोनी द्वारा भेंट किया गया। कार्यक्रम में मंच का सफल संचालन संस्था के मीडिया सचिव सागर सोनी द्वारा किया गयाकार्यक्रम में समाज का प्रबुद्ध वर्ग जिनमें महिलाएं एवं बच्चे भी शामिल थे, बडी संख्या में उपस्थित रहा। कार्यक्रम के सफल आयोजन में संस्था के सभी सदस्य का भरपूर योगदान रहा।

उमेश कुमार सोनी
                                                  कार्यक्रम संयोज